अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत
ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े भारतीय कारोबारियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही भुगतान संबंधी समस्याओं ने दोनों देशों के व्यापार को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों के बावजूद ईरान भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए व्यावहारिक विकल्प तलाशने पर जोर दे रहा है। फतहली के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संपर्क जारी है और व्यापार को सुचारु बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।
बासमती चावल की आपूर्ति पर भी ईरान ने भरोसा दिलाया है। ईरान भारत से बासमती चावल और चाय खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में प्रतिबंधों और भुगतान में आ रही दिक्कतों के बीच इन उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फतहली ने भारतीय बासमती चावल समेत जरूरी वस्तुओं की किल्लत होने की आशंका को खारिज किया।
ईरानी राजदूत के अनुसार, उनका देश संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटने की तैयारी कर चुका है और आयात के लिए उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके पीछे केवल आपूर्ति में कमी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। व्यापक आर्थिक दबाव भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण है।
फतहली ने कहा कि ईरान लगभग 47 वर्षों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और इस दौरान उसने उनके प्रभाव को कम करने के तरीके विकसित किए हैं। उन्होंने नैनो टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में ईरान की प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसके 15 पड़ोसी देश व्यापार तथा आर्थिक साझेदारी के लिए नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। ईरान दूसरे देशों के साथ पारस्परिक लाभ वाले संबंध बनाए रखने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशता रहेगा।
भारत और ईरान के कारोबार को अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से बचाने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हुई है। फतहली ने बताया कि भारतीय भागीदारों के साथ संपर्क जारी है। हालांकि, उन्होंने किसी अंतिम समझौते या नई व्यवस्था की घोषणा नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे उपायों को तय करने और लागू करने के लिए विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत तथा संबंधित पक्षों के बीच समन्वय जरूरी होगा।
चाबहार बंदरगाह को लेकर भी ईरान ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। भारत के संचालन से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने के बाद परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल उठे हैं।
फतहली ने कहा कि ईरान चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके विकास में योगदान देने के इच्छुक किसी भी देश के निवेश और भागीदारी का स्वागत किया जाएगा। हालांकि, बंदरगाह से संबंधित आगे की व्यवस्था और भारत-ईरान व्यापार को प्रभावित करने वाली बाधाओं के समाधान के लिए बातचीत तथा समन्वय महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
