October 25, 2026

मन की बात के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने गिनाए देशवासियों के प्रयास, खेती से स्वास्थ्य और तकनीक तक की उपलब्धियां

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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 139वें एपिसोड में देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की ओर से किए जा रहे सामाजिक, पर्यावरणीय और तकनीकी प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 12 साल पहले विजयदशमी के अवसर पर शुरू हुआ यह कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में देशवासियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए मन की बात किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। यह आम लोगों के परिश्रम, साहस, समर्पण और सेवा भावना को समझने के साथ उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

प्रधानमंत्री ने पंजाब में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेती विरासत मिशन नाम की संस्था पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के लिए नव-त्रिन्जन पहल शुरू की गई है। इसके तहत बिना रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के जैविक कपास उगाई जाती है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास से धागे और कपड़े तैयार करने में भी मदद मिलती है, जिससे उन्हें रंगने के लिए अलग से रसायनों की जरूरत कम होती है।

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का भी जिक्र किया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, नदी में पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत भी सूख रहे थे। इसके बाद नदी को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। वर्षा जल को रोकने, जमीन में पानी के पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे उपाय अपनाए गए। इन प्रयासों से हेवल नदी को फिर से जीवन देने में मदद मिली और कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन का रास्ता भी खुला।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में हो रहे कामों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव भेजी जा रही है। महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया है। शबरी नेचुरल्स के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की झलक दिखाई देती है, जिसे जापान के प्रतिष्ठित गुड डिजाइन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप के उदाहरण दिए। बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के सात वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हुई थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क किया। बच्चे को निमोनिया होने का पता चला और विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी स्थिति में सुधार हुआ।

इसी तरह, लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 वर्षीय कुन्ही कोया की तबीयत अचानक बिगड़ने पर ई-संजीवनी के जरिए कवरत्ती में मौजूद अनुभवी डॉक्टरों से सलाह ली गई। डॉक्टरों ने स्थानीय चिकित्सा दल को मार्गदर्शन दिया, जिससे मरीज को राहत पहुंचाने में मदद मिली। इन उदाहरणों के जरिए दूरदराज के इलाकों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता सामने आई।

प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास में स्थापित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का भी उल्लेख किया। इस केंद्र ने मस्तिष्क की उच्च रिजॉल्यूशन वाली डिजिटल त्रिआयामी तस्वीरें तैयार करने के लिए एक तकनीकी मंच विकसित किया है। इसका उद्देश्य आने वाले समय में 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग करना और उनका विस्तृत अध्ययन करना है। इस पहल को मस्तिष्क अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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