Uttarakhand: ग्राम प्रधानों का बीडीसी बैठक में हंगामा
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10 सूत्रीय मांगों पर सदन का किया बहिष्कार
चमोली के थराली स्थित नारायणबगड़ में क्षेत्र पंचायत की बैठक के दौरान ग्राम प्रधानों का आक्रोश फूट पड़ा। 10 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। मुख्य विकास अधिकारी के साथ तीखी बहस के बाद प्रधान अपनी मांगों पर अड़े रहे। ब्लॉक प्रमुख ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। ग्राम प्रधानों ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान करते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
नारायणबगड़ विकासखंड में आयोजित क्षेत्र पंचायत यानी बीडीसी की बैठक उस वक्त हंगामे में बदल गई, जब अपनी मांगों पर सुनवाई न होने से नाराज ग्राम प्रधान बैठक से उठकर बाहर निकल गए। प्रधान संघ अध्यक्ष योगेंद्र सिंह खत्री के नेतृत्व में ग्राम प्रधानों ने नारेबाजी करते हुए सदन का बहिष्कार किया। प्रधानों का आरोप है कि वे लंबे समय से अपनी मांगेंशासन-प्रशासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और ग्राम प्रधानों के बीच तीखी बहस भी हुई। ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला ने कई बार प्रधानों को समझाने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन नाराज प्रधान अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों में मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने, ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में शामिल होने वाले वार्ड सदस्यों को मानदेय देने और मनरेगा में ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग प्रमुख है।
इसके अलावा अकुशल श्रमिकों को 600 और कुशल श्रमिकों को 800 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने, राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि बढ़ाने तथा विधायक-सांसद निधि की तर्ज पर ग्राम प्रधान निधि बनाने की मांग भी उठाई गई है। प्रधानों ने 10 लाख रुपये तक के विकास कार्य ग्राम पंचायतों से कराने, पंचायत राज अधिनियम के तहत 29 विभागों के अधिकार ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने, जिला योजना में प्रधान संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करने और ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा कराने की मांग भी रखी है।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है, लेकिन पर्याप्त मानदेय, वित्तीय अधिकार और संसाधन नहीं मिलने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
