सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, घरेलू बाजार में फिसले भाव, अमेरिकी फेड की बैठक से पहले निवेशक सतर्क
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोने की कीमत खबर लिखे जाने तक 0.23 प्रतिशत गिरकर 4 हजार 133 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। वहीं चांदी में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली और इसकी कीमत 1.03 प्रतिशत फिसलकर 57.405 डॉलर प्रति औंस रह गई। वैश्विक बाजार में निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मजबूती को इस गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है इसलिए विदेशी बाजार में कमजोरी के साथ भारतीय निवेशकों की नजर भी सोने और चांदी के भाव पर बनी हुई है।
घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना एमसीएक्स पर करीब 519 रुपये यानी 0.35 प्रतिशत गिरकर 1 लाख 46 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र की शुरुआत में सोना अपने पिछले बंद भाव 1 लाख 46 हजार 519 रुपये से गिरकर 1 लाख 46 हजार 328 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। इसके बाद बिकवाली का दबाव बढ़ा और कीमत घटकर 1 लाख 45 हजार 689 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस तरह कारोबार के दौरान सोने में 830 रुपये तक की गिरावट देखने को मिली।
चांदी की कीमतों में भी तेज कमजोरी दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी करीब 2 हजार 267 रुपये यानी 1.07 प्रतिशत गिरकर 2 लाख 9 हजार 218 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। चांदी पिछले कारोबारी सत्र के 2 लाख 11 हजार 485 रुपये के बंद भाव के मुकाबले 2 लाख 10 हजार 400 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली थी। इसके बाद कीमतों में और गिरावट आई और एक समय चांदी 2 लाख 8 हजार 801 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी दिन के कारोबार में इसमें 2 हजार 684 रुपये तक की कमजोरी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके अलावा रूस की ऊर्जा खरीद से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले और वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी कमोडिटी बाजार को प्रभावित किया है। महंगे कच्चे तेल से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है जिससे केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों की नजर अब 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक पर है। बाजार के अनुमानों के अनुसार अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 16 प्रतिशत जबकि दिसंबर में बढ़ोतरी की संभावना लगभग 90 प्रतिशत बताई जा रही है। ब्याज दरें बढ़ने पर सोने जैसी संपत्तियों का आकर्षण घट सकता है क्योंकि इनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। मजबूत डॉलर भी सोने की मांग को सीमित कर सकता है।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों खासकर व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर निर्भर कर सकती है। यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मजबूत होने से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत महंगाई के नरम संकेत मिलने पर कीमती धातुओं में खरीदारी लौटने की संभावना बन सकती है। ऐसे में सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बाजार के उतार-चढ़ाव और अपने बजट को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
