बुखार से राहत पाने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, गूगल और रील देखकर दवा ले रहे लोग, किडनी को नुकसान का बढ़ा खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक सर्दी जुकाम और वायरल फीवर के दौरान हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं जबकि वायरल संक्रमण में इनका सामान्य तौर पर फायदा नहीं होता। बिना जरूरत या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने से भविष्य में बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम हो सकता है। इसी तरह कुछ पेनकिलर यानी दर्द निवारक दवाओं का गलत मात्रा में या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। खासकर पहले से किडनी की समस्या से जूझ रहे लोगों में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
एमबीबीएस एमडी और एफआईसीडी विशेषज्ञ डॉ. समन ताहिर के अनुसार उनके पास इलाज के लिए आने वाले करीब 50 प्रतिशत मरीज डॉक्टर से मिलने से पहले ही खुद दवाएं ले चुके होते हैं। उनके व्यक्तिगत क्लिनिकल अनुभव में ऐसे कई मरीज सामने आते हैं जिन्हें गलत दवा अनुचित खुराक या लंबे समय तक दवा लेने के कारण जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों से जुड़ा यह अनुभव किसी बड़े सर्वे का आंकड़ा नहीं है। उनका कहना है कि दवा की खुराक और उसे लेने की अवधि मरीज की बीमारी मेडिकल हिस्ट्री और किडनी की स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए।
डॉ. ताहिर ने करीब 20 साल के एक युवक का उदाहरण भी दिया जिसे सर्दी जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत रहती थी। युवक डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद ही दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक लेने लगा। हर बार कुछ राहत मिलने के कारण उसने दवाओं का इस्तेमाल जारी रखा। बाद में जांच में उसकी किडनी प्रोफाइल में गड़बड़ी और क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ पाया गया। हालांकि चिकित्सकीय जांच के बिना यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि किडनी की परेशानी केवल किसी एक दवा के कारण हुई थी।
ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना ने भी एक ऐसे मरीज का मामला बताया जिसे गर्दन की नस पर दबाव के कारण सिरदर्द हो रहा था। मरीज इसे सामान्य सिरदर्द समझकर करीब तीन महीने तक दर्द निवारक दवाएं लेता रहा। बाद में जांच में दर्द की असली वजह सामने आई और उसके क्रिएटिनिन में भी बढ़ोतरी पाई गई। इस मामले से स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक दर्द दबाने के बजाय उसकी मूल वजह का पता लगाना जरूरी है।
डॉक्टरों का कहना है कि अब कई लोग गूगल और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी देखकर अपनी दवा और एक्सरसाइज खुद तय करने लगे हैं। किसी दूसरे व्यक्ति को फायदा पहुंचाने वाला उपचार हर मरीज के लिए सही हो यह जरूरी नहीं है। लगातार बुखार दर्द या सर्दी जुकाम बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। पुराने पर्चे के आधार पर दवाएं दोबारा शुरू करने से भी बचना चाहिए।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने भी दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स के तर्कसंगत इस्तेमाल पर जोर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक वायरल फीवर के दौरान पर्याप्त आराम पानी और तरल पदार्थों का सेवन तथा जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह से उपचार करना बेहतर है। बिना सलाह के एंटीबायोटिक या पेनकिलर लेने से बचना चाहिए। तुरंत राहत पाने की जल्दबाजी में दवाओं का गलत इस्तेमाल बीमारी को और जटिल बना सकता है इसलिए लक्षणों को दबाने के बजाय सही जांच और उचित इलाज को प्राथमिकता देना जरूरी है।
