October 21, 2026

अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मजहर जमील ने भारत पर पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकवादी संगठनों का कथित तौर पर समर्थन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसके लिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का जिक्र करते हुए इसे ‘डोभाल सिद्धांत’ करार दिया।

पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के सलाहकार जमील ने दावा किया कि भारत अपनी रणनीति के तहत आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है और पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठनों को भारत का कथित समर्थन मिलने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

मुक्ति वाहिनी और एलटीटीई का भी किया जिक्र

13 अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) में अपने संबोधन के दौरान जमील ने भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने 1971 में मुक्ति वाहिनी और 1980 के दशक में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) को भारत से मिले कथित समर्थन का जिक्र किया।

उन्होंने अफगानिस्तान में 2001 से 2014 के बीच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) की मौजूदगी के दौरान अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के आसपास भारत द्वारा छह वाणिज्य दूतावास संचालित किए जाने का भी उल्लेख किया। जमील ने इन घटनाओं को पाकिस्तान में भारत की कथित गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की।

ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी जताई चिंता

जमील ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए ब्रह्मोस मिसाइलों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत ने ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं।

हालांकि, ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पारंपरिक वारहेड के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसे भारत की सामरिक परमाणु हथियारों से जुड़ी स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड का हिस्सा बताना भी सही नहीं है।

जमील ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने दक्षिण एशिया को परमाणु संघर्ष के कगार पर पहुंचा दिया था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के रणनीतिक संयम के कारण स्थिति को संभाला जा सका। ये उनके आरोप और आकलन हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइलों पर भी उठाए सवाल

जमील ने स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आकलन का हवाला देते हुए भारत की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलों की तैनाती के जरिए भारत अपनी सामरिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

उन्होंने दावा किया कि भारत ने अपने कुछ परमाणु वारहेड को पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ जोड़ दिया है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों की अलग से जांच जरूरी है।

2022 की ब्रह्मोस दुर्घटना को जानबूझकर किया गया हमला बताया

जमील ने मार्च 2022 में भारतीय वायु सेना की एक ब्रह्मोस मिसाइल के गलती से लॉन्च होने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना को पाकिस्तान पर जानबूझकर किए गए हमले के रूप में पेश किया।

दरअसल, मार्च 2022 में एक मिसाइल तकनीकी प्रक्रिया के दौरान गलती से लॉन्च हो गई थी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले में जाकर गिरी थी। भारत ने इस घटना को आकस्मिक मिसाइल प्रक्षेपण बताया था और मामले की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

जमील के बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान में भारत की बढ़ती सैन्य और सामरिक क्षमताओं को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने और जानबूझकर अस्थिरता फैलाने जैसे आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पाकिस्तानी अधिकारी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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