October 21, 2026

अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- परमाणु हथियार के चलते पाकिस्तान से संबंध रखना जरूरी

0
usa-1792564335


वाशिंगटन।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कई मतभेदों के बावजूद अमेरिका को पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखना पड़ता है। उन्होंने इसके पीछे पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और उसकी भौगोलिक स्थिति को प्रमुख कारण बताया। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ है।

सीएनएन-न्यूज18 को दिए एक साक्षात्कार में रुबियो ने कहा, “हम उन सभी के खिलाफ हैं, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।” पाकिस्तान के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी देश की विदेश नीति को संभालना है। इसके लिए अमेरिका को कई देशों के साथ संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, भले ही उनके साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मामले में भी यही स्थिति है। यह एक ऐसा देश है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं। साथ ही, उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका को उसके साथ बातचीत करने की जरूरत पड़ती है। रुबियो ने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से करते हुए कहा कि भारत सरकार भी ईरान के नेताओं के साथ संपर्क और संवाद बनाए रखती है।

पाकिस्तान से बातचीत क्यों जरूरी?

पांच महीने में दूसरी बार भारत यात्रा पर आए रुबियो ने कहा कि विभिन्न हितों और मतभेदों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल है, लेकिन विदेश नीति के तहत ऐसा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखना सकारात्मक परिणाम भी दे सकता है।

रुबियो के मुताबिक, यदि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंध बने रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच बातचीत होती है, तो इससे उन गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सकती है, जिनको लेकर भारत चिंतित है। उनके इस बयान को पाकिस्तान के साथ अमेरिकी कूटनीतिक संबंधों और भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होने की उम्मीद

मुंबई पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जल्द होने की उम्मीद जताई। बैठक में दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, रुबियो की यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की गति को दर्शाती है। मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका सहयोग को आगे बढ़ाने को महत्व देते हैं।

भारत को बताया तेल रिफाइनरी क्षेत्र की महाशक्ति

जयशंकर के साथ बैठक के बाद रुबियो ने भारत की तेल रिफाइनिंग क्षमता की सराहना करते हुए उसे इस क्षेत्र की महाशक्ति बताया। रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद पर उन्होंने कहा कि भारत ने बार-बार अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की इच्छा जताई है और इस दिशा में प्रगति हो रही है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका भी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अच्छा स्रोत बन सकता है। बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। रुबियो ने भारत से ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने और अमेरिकी तकनीक का उपयोग बढ़ाने की अपील भी की।

वेनेजुएला में तेल उत्पादन पर रिलायंस से चर्चा करेगा अमेरिकी दल

रुबियो ने बुधवार को गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रिफाइनरी के प्रस्तावित दौरे को लेकर मीडिया के सवालों का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला में तेल उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर रिलायंस के साथ चर्चा करेगा। इस संभावित बातचीत को ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *