महंगाई, महंगे किराए और भ्रष्टाचार के खिलाफ यूरोप में उग्र प्रदर्शन, फ्रांस से बाल्कन तक बढ़ा जनाक्रोश
नई दिल्ली । यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, महंगे आवास, कमजोर सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ जनाक्रोश तेज हो गया है। फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और बाल्कन क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में लोग सड़कों पर उतरकर सरकारों की नीतियों के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। कई स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक झड़पों, तोड़फोड़ और आगजनी में बदल गए हैं। युवाओं, छात्रों और कामगारों की भागीदारी ने इन आंदोलनों को व्यापक रूप दे दिया है।
फ्रांस में आंदोलन की शुरुआत माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और शैक्षणिक संसाधनों की कमी के विरोध से हुई। छात्र तीन सप्ताह से अधिक समय तक स्कूलों की नाकेबंदी कर रहे थे। बाद में श्रमिक संगठन सीजीटी और आम नागरिक भी इसमें शामिल हो गए। इसके बाद प्रदर्शन महंगाई और पेंशन नीतियों के विरोध तक फैल गया। पेरिस, मार्सिले, ल्योन और बोर्डो में झड़पों तथा लूटपाट की घटनाएं हुईं। लिमोज में 19वीं सदी के ऐतिहासिक सिटी हॉल को आग लगाए जाने से भारी नुकसान हुआ। देशभर में अब तक 2,400 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि गणराज्य और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।
इटली में महंगाई और घटती क्रय शक्ति के खिलाफ ‘इटालिया इन पियाजा’ आंदोलन के तहत हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। मिलान, ट्यूरिन और बोलोन्या में निकाले गए मार्च के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा भड़क गई। दुकानों में लूटपाट और वाहनों में आग लगाने की घटनाएं हुईं, जबकि सुरक्षा बलों के 14 जवान घायल हो गए। मिलान में दो दिनों के दौरान 271 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अधिकांश नाबालिग बताए गए हैं। प्रदर्शनकारी रोजगार की सुरक्षा, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अधिक बजट की मांग कर रहे हैं।
स्पेन और पुर्तगाल में आवास संकट विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख कारण बन गया है। स्पेन में न्यूनतम मासिक वेतन 1,221 यूरो बताया गया है, जबकि 80 वर्ग मीटर के सामान्य अपार्टमेंट का औसत किराया 1,130 यूरो तक पहुंच गया है। इस अंतर के कारण कई लोगों के लिए भोजन, परिवहन और अन्य जरूरतों पर खर्च करना मुश्किल हो रहा है। बार्सिलोना और मैड्रिड के पुएर्ता डेल सोल चौक पर प्रदर्शनकारियों ने कई सप्ताह से तंबू लगा रखे हैं। 87 वर्षीय मारिकारमेन को घर से बेदखल किए जाने और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु की घटना ने भी आक्रोश बढ़ाया है। मैड्रिड में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने वेतन वृद्धि की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। लिस्बन और पोर्टो में भी विरोध जारी है।
बाल्कन क्षेत्र में अल्बानिया और सर्बिया में सरकारों के खिलाफ असंतोष प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। अल्बानिया की राजधानी तिराना में लगातार छठे दिन विरोध प्रदर्शन हिंसक रहे। छात्रों और युवाओं के ‘फ्लेमिंगो’ आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय के बाहर बैरिकेड्स में आग लगाई और प्रधानमंत्री एदि रामा के इस्तीफे की मांग की। रामा ने आरोप लगाया कि अति-वामपंथी एंटीफा समूह प्रदर्शनकारियों को भड़का रहे हैं। सर्बिया में विश्वविद्यालय के छात्र पिछले दो वर्षों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। वे 25 अक्टूबर 2026 को होने वाले आम चुनावों से पहले राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की सत्ता में वापसी की संभावनाओं को चुनौती दे रहे हैं।
इन घटनाओं ने यूरोप में राजनीतिक अस्थिरता और आगामी चुनावों को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। कई देशों में दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी दल आर्थिक असंतोष को राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की हिंसा के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए सीमाएं पूरी तरह बंद करने की मांग की है। हालांकि, फ्रांस के स्थानीय प्रशासन ने विरोध के पीछे आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों और जीवन स्तर में गिरावट को प्रमुख कारण बताया है। महंगाई, आवास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं पर सरकारें कितनी प्रभावी राहत देती हैं, इसका असर आने वाले महीनों में यूरोप की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।
