सौरव दास-आशुतोष रांका पर लगी कई धाराएं, जंतर-मंतर प्रदर्शन केस की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी
जांच ट्रांसफर करने का फैसला दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने के कुछ समय बाद लिया गया। अब मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की आगे की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल करेगी।
दोनों एफआईआर में अलग-अलग धाराएं
कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223A, 332 और 61(2) लगाई गई हैं। ये धाराएं सरकारी आदेश की अवहेलना, अपराध के इरादे से घर या परिसर में प्रवेश और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।
वहीं, संसद मार्ग थाने में दर्ज दूसरी एफआईआर में BNS की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) शामिल हैं। ये धाराएं सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, चोट पहुंचाने, ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने और साझा मंशा से जुड़े आरोपों के तहत लगाई गई हैं।
पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर क्या आरोप लगाए?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर इलाके में प्रदर्शन के दौरान CJP के सदस्यों को हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी एक निजी परिसर से होकर जंतर-मंतर में प्रवेश कर रहे थे। बताया गया कि इस परिसर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से एक दिन पहले हटा दिया गया था। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को सरकारी काम करने से रोका गया। इन आरोपों की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी।
दो दिन बढ़ी न्यायिक हिरासत
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में भेजा था। सोमवार को दोनों को मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।
इस मामले में CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को पीस बॉन्ड पर रिहा किया गया है। उन्हें छह महीने तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त के साथ निजी मुचलके और 5,000 रुपये की जमानत राशि पर छोड़ा गया। फिलहाल, सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े मामलों की आगे की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल करेगी।
