दशहरे पर अक्षरधाम मंदिर में 108 यज्ञकुंडों के साथ विश्व शांति महायज्ञ, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा
महायज्ञ के आयोजन को लेकर अक्षरधाम मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। परिसर में रंगोली बनाई गई और ध्वज-पताकाएं लगाई गईं। उत्सव के वातावरण में सुबह छह बजे संतों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ का शुभारंभ किया। वैदिक परंपराओं के अनुसार, अनुष्ठान के दौरान 108 यज्ञकुंडों में पवित्र आहुतियां अर्पित की गईं। धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं और बच्चों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
विश्व शांति महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि विभिन्न देशों और क्षेत्रों में जारी युद्ध, हिंसा तथा अशांति की परिस्थितियां समाप्त हों। लोगों के बीच आपसी विश्वास बढ़े और समाज में प्रेम, सहयोग तथा भाईचारे की भावना मजबूत हो।
इस आयोजन की परंपरा बीएपीएस स्वामिनारायण संस्था के प्रमुख महंतस्वामी महाराज से जुड़ी है। उनके द्वारा विश्व शांति यज्ञ की शुरुआत किए जाने के बाद से हर साल दशहरे के अवसर पर अक्षरधाम परिसर में इस महायज्ञ का आयोजन किया जाता रहा है। इस वार्षिक परंपरा के जरिए विजयदशमी के धार्मिक महत्व को व्यापक सामाजिक और वैश्विक संदेश के साथ जोड़ा जाता है।
कार्यक्रम के दौरान महंतस्वामी महाराज के संदेश को भी दोहराया गया। संदेश में कामना की गई कि दुनिया में जहां भी युद्ध, हिंसा और अराजकता की स्थिति है, उसका जल्द अंत हो। सभी लोग प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करें। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा की भावना विकसित हो। इस उद्देश्य के लिए भगवान स्वामिनारायण के चरणों में प्रार्थना की गई।
विजयदशमी को परंपरागत रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के अनुरूप महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ संपूर्ण विश्व की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। लोगों ने समाज में एकता, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान बढ़ाने का संकल्प भी लिया।
अनुष्ठान के दौरान उपस्थित लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी गई। श्रद्धालुओं ने नकारात्मकता, अहंकार और घृणा जैसी भावनाओं को त्यागकर सकारात्मक सोच अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन के जरिए यह संदेश दिया गया कि शांति की स्थापना के लिए व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक व्यवहार में प्रेम तथा सद्भाव को महत्व देना आवश्यक है।
अक्षरधाम में आयोजित इस महायज्ञ ने विजयदशमी के अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ वैश्विक कल्याण की भावना को प्रमुखता दी। वैदिक मंत्रोच्चार, सामूहिक आहुतियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच विश्व शांति की कामना की गई। आयोजन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि युद्ध और हिंसा से मुक्त दुनिया के निर्माण के लिए प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जाना चाहिए।
