जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज
भोपाल । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज की बहस के बीच कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने रिजीम चेंज गैंग का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता परिवर्तन के सपने देख रहे हैं और इसके लिए तरह-तरह के नैरेटिव गढ़ रहे हैं। शिवराज ने कहा कि जनता के जनादेश के सामने ऐसे सपने साबुन के बुलबुले की तरह फूट जाते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर भारत में उनकी दाल क्यों नहीं गल रही। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि अगर विपक्ष को अपनी स्थिति समझ नहीं आती तो वे अगले दिन इसका जवाब देंगे।
शिवराज सिंह चौहान की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब देश की राजनीति में रिजीम चेंज को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात कह चुके हैं। वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी सत्ता परिवर्तन की लड़ाई का उल्लेख किया था। इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस जारी है। शिवराज ने अपनी पोस्ट में किसी नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन रिजीम चेंज गैंग कहकर विपक्षी खेमे पर निशाना साधा।
केंद्रीय मंत्री ने अपने तंज में चुनावी नतीजों और छात्र संगठनों की जीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी की जीत का जिक्र किया। इसके साथ ही ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी को मिली सफलता को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया। शिवराज का कहना था कि इन नतीजों को जनता के रुख के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने गुजरात के निकाय चुनावों और असम पश्चिम बंगाल तथा पुडुचेरी के उपचुनावों का भी उल्लेख किया।
शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में कहा कि गांव हो या शहर युवा हों या आम नागरिक जनता का मूड कुछ और है जबकि रिजीम चेंज गैंग की स्क्रिप्ट कुछ और चल रही है। उनके बयान का संकेत इस ओर था कि राजनीतिक विरोधियों की रणनीति और जनता के वास्तविक रुझान के बीच अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी हार के बाद भी विपक्ष अपनी रणनीति पर आत्ममंथन क्यों नहीं कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि उसे अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि जनता उसके संदेश को किस तरह स्वीकार कर रही है। उनके मुताबिक केवल सत्ता परिवर्तन की बात करने या राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने से जनसमर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे अहम होता है और चुनावी नतीजे उसी का संकेत देते हैं।
अपनी पोस्ट के अंत में शिवराज ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि रिजीम चेंज गैंग आत्ममंथन के बाद भी बात नहीं समझ पाता तो वे अगले दिन बताएंगे कि उसकी दाल क्यों नहीं गल रही। उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि शिवराज सिंह चौहान अगले दिन अपने वादे के मुताबिक क्या नया तर्क रखते हैं और विपक्ष की ओर से इस टिप्पणी पर कैसी प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल उनका बयान सत्ता परिवर्तन की बहस के बीच भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक जुबानी जंग का नया हिस्सा बन गया है।
