मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश से गिरा तापमान, 20 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी रात की ठंडक
मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 72 घंटे से आंधी और बारिश का दौर जारी है। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। लगातार बदलते मौसम के कारण दिन के तापमान में 2.8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के 15 जिलों में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। वहीं अनुमान है कि 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट के साथ ठंडक बढ़ने लगेगी।
मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक रविवार को नीमच मंदसौर श्योपुर शिवपुरी गुना अशोकनगर निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर पन्ना मऊगंज सीधी सिंगरौली सिवनी और बालाघाट में बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ मौसम बदलने की संभावना है। पश्चिमी और उत्तरी मध्य प्रदेश में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से इंदौर उज्जैन ग्वालियर चंबल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में मौसम प्रभावित हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को भी इन क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई थी। बड़वानी जिले के सेंधवा सीहोर और पीथमपुर में भी पानी गिरा जबकि रीवा और सागर संभाग के कई इलाकों में बादल छाए रहे।
मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद मौसम में बदलाव आने की संभावना है। 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट होने से ठंडक बढ़ सकती है। अक्टूबर में दिन के समय गर्मी रात में हल्की ठंडक और बीच-बीच में बारिश का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी प्रदेश में मौसम का यही मिला-जुला रूप दिखाई दे रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही लौट चुका है। इसके बावजूद नए मौसमी सिस्टम सक्रिय होने से बारिश का दौर दोबारा शुरू हो गया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता रहा है। इस बार भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही परिस्थितियां बन रही हैं। महीने की शुरुआत में कई जिलों में मौसम साफ हुआ था और तेज धूप निकली थी लेकिन बाद में आंधी और बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया।
प्रदेश में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी हिस्से के जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक बताया गया है। हालांकि कुछ जिलों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है। बालाघाट छिंदवाड़ा दमोह जबलपुर नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश की कमी सामने आई है। आलीराजपुर अशोकनगर बड़वानी बैतूल देवास धार हरदा इंदौर झाबुआ खंडवा मंदसौर मुरैना नर्मदापुरम नीमच रायसेन रतलाम सीहोर शाजापुर उज्जैन और विदिशा में सामान्य से नौ से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल राजगढ़ बुरहानपुर खरगोन कटनी मंडला डिंडौरी ग्वालियर गुना दतिया पन्ना छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी मैहर आगर-मालवा भिंड श्योपुर सिंगरौली सीधी सतना मऊगंज शहडोल उमरिया और अनूपपुर सहित 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा होने की जानकारी दी गई है।
इस साल जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश के कारण आंकड़ों में सुधार हुआ लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। मानसून के अंतिम दौर में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब चार प्रतिशत कम रही। मध्य प्रदेश में औसत मौसमी बारिश लगभग 37.3 इंच मानी जाती है।
राजधानी भोपाल सहित इंदौर ग्वालियर जबलपुर और उज्जैन में अक्टूबर के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ग्वालियर में इस महीने दिन का तापमान कई बार 38 डिग्री के पार पहुंच चुका है जबकि इंदौर में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में रात की ठंडक बढ़ने लगती है। जबलपुर और उज्जैन में भी इस महीने बारिश के साथ तापमान में बदलाव का इतिहास रहा है। फिलहाल प्रदेश के कई जिलों में लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए बारिश और तेज हवाओं की संभावना वाले इलाकों में सतर्क रहने की जरूरत है।
