अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे तिमाही नतीजे, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव
बीते सप्ताह निफ्टी 50 में 2.77 प्रतिशत और सेंसेक्स में 3.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में नई खरीदारी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड के दबाव में कमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे सत्र में तेजी रही। इससे हालिया गिरावट के बाद बाजार में आई रिकवरी को मजबूती मिली।
शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,729.27 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 148.80 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,146.15 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 2,256.94 अंक और निफ्टी में 625.7 अंक की बढ़त रही। अब बाजार की नजर इस तेजी के आगे बने रहने की संभावनाओं पर है।
अगले सप्ताह सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होंगे। बाजार यह आकलन करेगा कि हालिया तेजी केवल आईटी शेयरों तक सीमित रहती है या बैंकिंग, उपभोक्ता और औद्योगिक क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुझान दिखाई देता है। कंपनियों के राजस्व, मुनाफे, मार्जिन और मांग की स्थिति से जुड़े आंकड़ों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणियां और आने वाली तिमाहियों के लिए जारी किया जाने वाला कारोबारी मार्गदर्शन भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है। बेहतर नतीजे और सकारात्मक भविष्य के संकेत शेयरों में खरीदारी बढ़ा सकते हैं। इसके विपरीत, कमजोर वित्तीय प्रदर्शन या कारोबार को लेकर सतर्क अनुमान निवेशकों को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई का रुख भी बाजार के लिए अहम रहेगा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कुछ कमी आने से बाजार को राहत मिली है, लेकिन आगे उनकी गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली दोबारा बढ़ती है, तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।
वैश्विक बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत होगा। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयरों का मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि निवेशकों के लिए निश्चित आय वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसके विपरीत, बॉन्ड यील्ड में नरमी आने पर जोखिम वाले निवेश विकल्पों में रुचि बढ़ने की संभावना रहती है। मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदें भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और लाभ मार्जिन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। वहीं, वैश्विक तनाव बढ़ने से वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है।
कुल मिलाकर, अगले सप्ताह शेयर बाजार में कंपनियों के नतीजों और घरेलू-वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी। बीते सप्ताह की तेजी के बाद बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह काफी हद तक इन कारकों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगा।
