एबी डिविलियर्स ने बताया विराट कोहली को देखकर कैसा था पहला इंप्रेशन, बोले- शुरुआत में घमंडी लगते थे भारतीय स्टार बल्लेबाज
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान डिविलियर्स से पूछा गया कि विराट कोहली को पहली बार देखने पर उनके मन में क्या विचार आए थे। इस सवाल के जवाब में उन्होंने मजाकिया अंदाज में स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें विराट घमंडी और मगरूर लगते थे। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है विराट खुद भी उनकी इस बात से सहमत हों। हालांकि, डिविलियर्स ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को पूरी तरह गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। वह इसे हल्के-फुल्के अंदाज में कह रहे थे और उनका मकसद विराट के व्यक्तित्व पर नकारात्मक टिप्पणी करना नहीं था।
डिविलियर्स के मुताबिक, जब विराट कोहली 19, 20 या 21 साल के थे, तब उनके अंदर आत्मविश्वास भरपूर था। युवा उम्र में ही विराट अपने खेल को लेकर काफी दृढ़ दिखाई देते थे और उन्हें खुद की क्षमताओं पर पूरा भरोसा था। डिविलियर्स ने इसी आत्मविश्वास को उनके शुरुआती व्यवहार की एक प्रमुख वजह बताया। उनके अनुसार, कई बार किसी खिलाड़ी का खुद पर मजबूत भरोसा दूसरों को घमंड या मगरूर होने जैसा लग सकता है, जबकि वास्तविकता में वह अपने प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त होता है।
उन्होंने यह भी समझाया कि शीर्ष स्तर पर क्रिकेट खेलने और सफलता हासिल करने के लिए आत्मविश्वास बेहद जरूरी होता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाए रखने और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ी को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना पड़ता है। युवा खिलाड़ियों में यह विश्वास कभी-कभी उनके व्यवहार में अधिक आक्रामकता के रूप में नजर आ सकता है। विराट कोहली के मामले में भी डिविलियर्स ने उनके शुरुआती अंदाज को इसी नजरिए से देखा।
समय के साथ विराट के व्यक्तित्व में आए बदलाव का जिक्र करते हुए डिविलियर्स ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ वह एक खिलाड़ी और इंसान के तौर पर अधिक परिपक्व हुए। उनके शुरुआती करियर में खुद को साबित करने की चुनौती काफी बड़ी थी। ऐसे दौर में उनका आक्रामक रवैया और खुद पर जरूरत से ज्यादा भरोसा होने की छवि कुछ लोगों को अलग तरह से दिखाई दे सकती थी। लेकिन अनुभव बढ़ने और क्रिकेट में लगातार आगे बढ़ने के साथ उनके व्यवहार में भी बदलाव आया।
विराट कोहली ने अपने करियर में बल्लेबाजी के दम पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी आक्रामकता और जीत के लिए लगातार प्रयास करने की प्रवृत्ति उनके खेल की पहचान रही है। मैदान पर उनका जोशीला अंदाज कई बार चर्चा का विषय बनता रहा है, लेकिन उनके प्रशंसक इसी प्रतिस्पर्धी भावना को उनकी ताकत भी मानते हैं। डिविलियर्स की टिप्पणी इसी शुरुआती छवि और समय के साथ आए बदलाव को सामने लाती है।
आईपीएल के दौरान विराट कोहली और एबी डिविलियर्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए लंबे समय तक साथ खेला। दोनों के बीच तालमेल ने टीम को कई मुकाबलों में मजबूत स्थिति दिलाई। बल्लेबाजी के दौरान एक-दूसरे की शैली को समझना और मैदान पर बेहतरीन साझेदारियां करना उनकी जोड़ी की खासियत रही। साथ खेलने के दौरान उनकी दोस्ती भी मजबूत हुई और दोनों कई मौकों पर एक-दूसरे की तारीफ करते दिखाई दिए।
डिविलियर्स का यह बयान विराट कोहली के शुरुआती दिनों की उनकी व्यक्तिगत धारणा पर आधारित है। उन्होंने इसे मजाकिया संदर्भ में रखते हुए विराट के आत्मविश्वास और समय के साथ उनके परिपक्व होने की बात कही। उनकी टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि किसी खिलाड़ी के शुरुआती व्यवहार को समझने के लिए उसकी उम्र, अनुभव और करियर की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
