October 18, 2026

कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर भगदड़, 17 लोगों की मौत, मंत्री बोले- सीटी और अफवाह से बिगड़े हालात

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के उत्तरी हिस्से में स्थित चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी के अवसर पर कथित तौर पर भगदड़ मच गई। खबर में 17 लोगों की मौत और करीब 40 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। घटना के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

राज्य के मंत्री उमेश राय ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि महासप्तमी के मौके पर बड़ी संख्या में लोग दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शन के लिए निकले थे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई और बारिश से बचने के लिए लोग चोरबागान पंडाल के आसपास जमा होने लगे।

सीटी या घोषणा के बाद अचानक बढ़ी भीड़

मंत्री उमेश राय के मुताबिक, बारिश के बीच मची अफरा-तफरी के दौरान किसी ने संभवतः सीटी बजाई या कोई घोषणा की, जिसके बाद लोगों को पंडाल के अंदर जाने का संकेत मिला। इसके बाद अचानक बड़ी संख्या में लोग एक साथ आगे बढ़े और हालात बेकाबू हो गए।

मंत्री ने इसे भगदड़ की संभावित वजह बताया है। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और भीड़ में अफरा-तफरी शुरू होने के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अस्पतालों में घायलों का इलाज, छह मृतकों की पहचान का दावा

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायलों को निकालकर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, डॉक्टरों ने घायलों की हालत स्थिर बताई है और उनका इलाज जारी है। खबर में अब तक छह मृतकों की पहचान होने की बात भी कही गई है।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अस्पताल में मौजूद रहे और उपचाराधीन लोगों तथा उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। हादसे के मद्देनजर सरकार की ओर से आगामी कार्यक्रम रद्द किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को सहायता देने और घायलों को उपचार उपलब्ध कराने की बात कही गई है। घटना के बाद भीड़ प्रबंधन, पंडाल में प्रवेश की व्यवस्था और अफवाह से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।

नोट: इस खबर में हताहतों की संख्या, मंत्री के बयान और मुख्यमंत्री की भूमिका संबंधी विवरण उपलब्ध कराए गए मूल पाठ पर आधारित हैं। प्रकाशन से पहले घटना और संबंधित आधिकारिक बयानों की स्वतंत्र पुष्टि कर लें।

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