रीढ़ की सर्जरी से डरने की जरूरत नहीं, इंदौर में 80 डॉक्टरों और मरीजों ने साइकिल चलाकर बताया कैसे लौट सकती है सामान्य जिंदगी
इंदौर । इंदौर में वर्ल्ड स्पाइन डे के अवसर पर रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से स्पाइन हेल्थ अवेयरनेस साइक्लोथॉन का आयोजन किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 70 से 80 वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन स्पाइन सर्जन और एनेस्थेटिस्ट ने हिस्सा लिया। डॉक्टरों के साथ स्पाइन सर्जरी करा चुके कुछ मरीज भी साइकिल चलाते नजर आए। इस पहल के जरिए लोगों को नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। साथ ही रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर लोगों के मन में मौजूद डर और भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की गई।
इस साइक्लोथॉन का आयोजन इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन यानी ISSA की ओर से किया गया। कार्यक्रम में शामिल चिकित्सकों ने बताया कि रीढ़ की हड्डी शरीर की महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक है। इसकी सेहत का असर व्यक्ति की चाल और शारीरिक गतिविधियों से लेकर रोजमर्रा के कामकाज तक पर पड़ता है। लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना शारीरिक गतिविधियों की कमी और फिटनेस पर ध्यान नहीं देना कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी है। साइक्लोथॉन के माध्यम से डॉक्टरों ने लोगों को अपनी सेहत के लिए समय निकालने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि हाल ही में स्पाइन सर्जरी करा चुके एक-दो मरीजों ने भी डॉक्टरों के साथ साइकिल चलाई। उनकी भागीदारी का उद्देश्य यह बताना था कि उचित इलाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रिकवरी होने के बाद कई मरीज फिर से सक्रिय जीवनशैली अपना सकते हैं। हालांकि सर्जरी के बाद हर मरीज की स्थिति अलग होती है और व्यायाम या साइकिल चलाने जैसी गतिविधियां शुरू करने का समय इलाज करने वाले डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए।
ISSA के सचिव डॉ. अविनाश जैन ने बताया कि समाज में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ लोग यह सोचकर ऑपरेशन कराने से बचते हैं कि इसके बाद वे सामान्य जीवन नहीं जी पाएंगे या उनकी शारीरिक गतिविधियां हमेशा के लिए सीमित हो जाएंगी। ऐसे डर के कारण कई बार लोग समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से भी हिचकते हैं। सर्जरी करा चुके मरीजों को साइकिल चलाते देखना उन लोगों के लिए भरोसा बढ़ाने वाला संदेश है जो इलाज को लेकर असमंजस में रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सही जांच उचित उपचार और पुनर्वास की प्रक्रिया से कई मरीजों को अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लौटने में मदद मिल सकती है।
साइक्लोथॉन का नेतृत्व इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एसके लूनावत उपाध्यक्ष डॉ. प्रसाद पटगांवकर और सचिव डॉ. अविनाश जैन ने किया। एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स ऑफ इंदौर के सचिव डॉ. प्रणव महाजन भी आयोजन में शामिल हुए। वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मसंद और डॉ. मनचंदा सहित अन्य चिकित्सकों ने भी अपनी भागीदारी निभाई। आयोजन में शहर के सक्रिय साइकिल राइडर्स ने भी हिस्सा लिया।
कार्यक्रम को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में इंदौर यातायात पुलिस ने सहयोग दिया। आयोजन के अंत में एसोसिएशन की ओर से चिकित्सकों एनेस्थीसिया क्लब के सदस्यों साइकिल राइडर्स और प्रशासन के प्रति आभार जताया गया। वर्ल्ड स्पाइन डे पर आयोजित इस पहल ने रीढ़ की हड्डी की सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ाने और सर्जरी के बाद सामान्य जीवन में लौटने की संभावनाओं पर सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि वे नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएं और रीढ़ से जुड़ी परेशानी होने पर खुद इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें।
