October 15, 2026

MP में 18 अक्टूबर तक आंधी-बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल में रहेगा ज्यादा असर

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भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने गुरुवार से अगले चार दिन यानी 15 से 18 अक्टूबर तक प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई है। ग्वालियर-चंबल संभाग में इसका ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, जबकि उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी बारिश होने के आसार हैं। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से मौसम में बदलाव आएगा। गुरुवार को ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, नीमच और मंदसौर में बारिश की संभावना है। इसके बाद 16, 17 और 18 अक्टूबर को बारिश का दायरा बढ़ सकता है।

अक्टूबर में फिर बारिश, रात में बढ़ रही ठंडक

मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण बारिश का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। पिछले सप्ताह पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि, रविवार और सोमवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड का मिला-जुला असर रहता है। इस साल भी मौसम का यही मिजाज दिखाई दे रहा है। महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने के साथ धूप खिली, जबकि रात के समय ठंडक महसूस की जा रही है। इसी बीच, मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से कई जिलों में बारिश हो रही है।

इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

मानसून सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश

जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़ों में अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में औसतन 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।

पूर्वी हिस्से के इन जिलों में भी कम हुई बारिश

पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर बारिश का आंकड़ा औसत से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 जिले पीछे

प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक दर्ज की गई। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

इसके विपरीत, 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

मानसून के दौरान जून में हुई कम बारिश की भरपाई बाद के महीनों में पूरी तरह नहीं हो सकी। अब अक्टूबर में सक्रिय हुए नए सिस्टम से प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर बारिश होने की संभावना है।

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