October 14, 2026

45 साल के हुए गौतम गंभीर, वर्ल्ड कप फाइनल की पारियों से लेकर नेपियर के 137 रन तक, जानिए उनके करियर के यादगार पल

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नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर बुधवार 14 अक्टूबर को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। बतौर खिलाड़ी गंभीर ने भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। टी20 विश्व कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 रन और वनडे विश्व कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 97 रन की उनकी पारियां आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं। हालांकि गंभीर के करियर की एक और पारी ऐसी है जो उनकी तकनीक धैर्य और संघर्ष क्षमता की मिसाल मानी जाती है। साल 2009 में न्यूजीलैंड के नेपियर में खेली गई 137 रन की उनकी पारी ने भारतीय टीम को निश्चित दिखाई दे रही हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

नेपियर टेस्ट में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 619 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी। इसके जवाब में भारतीय टीम पहली पारी में महज 305 रन पर सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मैच बचाने की थी। दूसरी पारी में विकेट जल्दी गिरते तो न्यूजीलैंड की जीत लगभग तय हो सकती थी। ऐसे मुश्किल हालात में गौतम गंभीर वीरेंद्र सहवाग के साथ सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरे। सहवाग 22 रन बनाकर आउट हो गए लेकिन गंभीर ने एक छोर संभालकर बल्लेबाजी जारी रखी।

गंभीर ने इसके बाद राहुल द्रविड़ के साथ दूसरे विकेट के लिए 133 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने 376 गेंदों का सामना करते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। द्रविड़ ने 62 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद गंभीर ने सचिन तेंदुलकर के साथ तीसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े। तेंदुलकर ने 64 रन का योगदान दिया। इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण के साथ गंभीर ने चौथे विकेट के लिए 96 रन की साझेदारी की। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों का मुख्य लक्ष्य तेजी से रन बनाना नहीं बल्कि क्रीज पर टिके रहकर मैच को हार से बचाना था।

गंभीर की एकाग्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 436 गेंदों का सामना करते हुए 137 रन बनाए। वह करीब 643 मिनट तक क्रीज पर डटे रहे। उनकी इस मैराथन पारी ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लगातार मेहनत करने पर मजबूर किया और भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा। गंभीर के आउट होने के बाद लक्ष्मण ने नाबाद 124 रन बनाए जबकि युवराज सिंह 54 रन बनाकर नाबाद रहे। दोनों ने बचा हुआ समय निकालते हुए न्यूजीलैंड को जीत से दूर रखा। मैच समाप्त होने तक भारत ने दूसरी पारी में चार विकेट पर 476 रन बना लिए थे और मुकाबला ड्रॉ हो गया।

इस ऐतिहासिक मुकाबले में द्रविड़ सचिन लक्ष्मण और युवराज ने भी अहम योगदान दिया लेकिन गंभीर की पारी को भारतीय टेस्ट क्रिकेट के धैर्यपूर्ण प्रदर्शनों में विशेष स्थान मिलता है। यह पारी बताती है कि क्रिकेट में हर बार बड़ी जीत के लिए तेज रन बनाना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी क्रीज पर टिके रहना और परिस्थितियों के अनुसार खेलना भी टीम के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाता है।

14 अक्टूबर 1981 को दिल्ली में जन्मे गंभीर ने 2003 से 2016 के बीच भारत के लिए 58 टेस्ट 147 वनडे और 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उन्होंने टेस्ट में 4154 वनडे में 5238 और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 932 रन बनाए। 2011 के वनडे विश्व कप और 2007 के टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। साल 2018 में संन्यास लेने के बाद गंभीर ने कोचिंग और क्रिकेट प्रशासन में अपनी नई पारी शुरू की। नौ जुलाई 2024 को भारतीय टीम के मुख्य कोच बने गंभीर के नेतृत्व में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। खिलाड़ी के रूप में संघर्ष और निर्णायक मौकों पर प्रदर्शन करने वाले गंभीर अब कोच के तौर पर भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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