October 14, 2026

जबलपुर के अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ का आरोप, एक्सपायरी दवाओं का जखीरा मिला, युवक की मौत की जांच तेज

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जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में बिना आवश्यक रजिस्ट्रेशन के संचालित किए जा रहे एक अस्पताल में जांच के दौरान एक्सपायरी दवाएं मिलने का मामला सामने आया है। बेलखाड़ू के पास स्थित अश्वनी अस्पताल में मंगलवार शाम ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में जांच की। करीब एक घंटे चली कार्रवाई के दौरान अस्पताल से 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। इनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थीं। टीम ने लगभग 12 हजार रुपये की दवाएं जब्त की हैं। शुरुआती जांच में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल संचालिका सरिता साहू के पास एलोपैथिक चिकित्सा की मान्य डिग्री भी नहीं थी। आरोप है कि इसके बावजूद वह लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रही थीं।

यह मामला 19 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत के बाद सामने आया है। तीन दिन पहले युवक की मौत के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था। मंगलवार को जांच के लिए अस्पताल खुलवाया गया तो वहां बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी मिलीं। इससे अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया और दवाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि दवाओं की स्थिति और युवक की मौत के बीच सीधा संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

जानकारी के मुताबिक बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ले में रहने वाले शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक तेज पेट दर्द हुआ था। परिजन उसे खैरी गांव स्थित अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां सुबह तक इलाज कराने के बाद वे उसे घर ले आए। लेकिन घर पहुंचने के कुछ समय बाद ही शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। उसकी बिगड़ती हालत देखकर परिजन उसे दोबारा अस्पताल ले गए। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही की आशंका जताई और पुलिस से शिकायत की।

समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि अस्पताल संचालिका सरिता साहू के कहने पर उनके मददगार सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे। अगले दिन उसे फिर इंजेक्शन दिया गया और ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई। परिजनों के मुताबिक ड्रिप चढ़ने के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई। पुलिस को घटनास्थल से मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी। इसके बाद आधी भरी बोतल ड्रिप निडिल इंजेक्शन की खाली शीशी और दवाइयों के रैपर जब्त किए गए थे।

मंगलवार को ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल बीएमओ डॉ. श्रीपति मिश्रा और बेलखाड़ू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा की टीम ने अस्पताल में रखी दवाओं की जांच की। अधिकारियों के मुताबिक यहां 23 तरह की एलोपैथिक दवाएं मिलीं जिनमें एक्सपायरी दवाएं और ग्लूकोज की ड्रिप भी शामिल थी। यह आशंका भी जांच के दायरे में है कि शेखर को चढ़ाई गई ड्रिप में मिलाया गया इंजेक्शन एक्सपायरी हो सकता है। इसकी पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही होगी।

अधिकारियों के अनुसार अस्पताल का आवश्यक रजिस्ट्रेशन नहीं मिला और संचालिका के पास एलोपैथिक इलाज करने की मान्य डिग्री भी नहीं थी। जांच टीम ने सरिता साहू को कई बार मौके पर बुलाया लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के संचालन दवाओं की वैधता और युवक की मौत के कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं की कोई भूमिका थी या नहीं और इस मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।

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