October 13, 2026

दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में लगे पोस्टर, मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील पर विवाद

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नई दिल्ली:
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा के बीच मांस, बिरयानी और पूजा से जुड़ी सामग्री हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील वाले पोस्टर लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई इलाकों में दिखाई दिए इन पोस्टरों में लोगों से कहा गया है कि बिरयानी खाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे हिंदू दुकानदारों से ही खरीदा जाए। इसी तरह मांस और पूजा की सामग्री भी हिंदू व्यापारियों से खरीदने की अपील की गई है। इन संदेशों ने त्योहार के दौरान धार्मिक पहचान, कारोबार और सामाजिक सौहार्द को लेकर बहस तेज कर दी है।

ये पोस्टर सिलीगुड़ी के भारत नगर सहित कई स्थानों पर लगाए गए हैं। कुछ पोस्टर तरुण तीर्थ क्लब के दुर्गा पूजा आयोजन स्थल के आसपास की दीवारों पर भी दिखाई दिए। इन संदेशों में लोगों से हिंदू व्यापारियों का समर्थन करने और समुदाय के कारोबार को बढ़ावा देने की अपील की गई है। पोस्टर लगाने की जिम्मेदारी हिंदू जागरण मंच ने ली है। संगठन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य हिंदुओं में एकता की भावना को मजबूत करना और त्योहार के दौरान हिंदू दुकानदारों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। संगठन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि ये संदेश किसी तरह का आदेश नहीं, बल्कि लोगों से की गई अपील हैं।

हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि अभिषेक दास के अनुसार, पोस्टर केवल भारत नगर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास भी लगाए गए हैं। संगठन इन संदेशों के जरिए हिंदू एकता का विचार सामने रखना चाहता है। मंच से जुड़े लोगों का तर्क है कि दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करते हैं और इस आर्थिक गतिविधि का लाभ हिंदू व्यापारियों को भी मिलना चाहिए। पोस्टरों में मांस और बिरयानी की दुकानों के अलावा पूजा सामग्री बेचने वाले कारोबारियों का भी उल्लेख किया गया है। इस तरह धार्मिक पहचान को खरीदारी के विकल्प से जोड़ने की कोशिश की गई है।

हालांकि, इस अभियान को लेकर राजनीतिक विरोध भी सामने आया है। सिलीगुड़ी के पूर्व महापौर और वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के संदेश समाज में धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े संगठनों पर धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार के अभियान पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि दुर्गा पूजा बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस दौरान सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।

इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उनके आवास के पास पूजा स्थल के आसपास पोस्टर किसने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टर लगाने वाले ही उनके उद्देश्य के बारे में बता सकते हैं। इस बयान के बाद भी पोस्टर अभियान को लेकर चर्चा जारी है। एक ओर संगठन इसे हिंदू व्यापारियों को प्रोत्साहित करने और समुदाय के भीतर एकजुटता बढ़ाने का प्रयास बता रहा है, वहीं आलोचक इसे धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी को प्रभावित करने वाला कदम मान रहे हैं। दुर्गा पूजा के दौरान सामने आया यह मामला अब व्यापारिक हितों, व्यक्तिगत पसंद और बंगाल की सामाजिक परंपराओं से जुड़ी बहस का विषय बन गया है।

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