फौजी पिता की बेटी नेहा बोरा कैसे बनीं Gen-Z की चर्चित आवाज, थिएटर से जेएनयू और छात्र राजनीति तक का सफर
नेहा का जन्म उत्तराखंड के खटीमा में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे और नौकरी के कारण परिवार को अलग-अलग स्थानों पर रहना पड़ता था। इस वजह से नेहा का बचपन विभिन्न सैन्य छावनियों और अलग-अलग सांस्कृतिक परिवेशों में बीता। उन्होंने दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल में पूरी की। उनके मुताबिक, स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनकी वैचारिक समझ विकसित होने लगी थी। इसी समय वह कम्युनिस्ट विचारक चारू मजूमदार, कवि पाब्लो नेरुदा और लेखिका अरुंधति रॉय के विचारों तथा रचनाओं से परिचित हुईं। इनसे उनके सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार मिला।
राजनीति में सक्रिय होने से पहले नेहा का जुड़ाव रंगमंच से रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से परफॉर्मेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में पीएचडी के लिए दाखिला लिया। वह दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर समूह संगवारी के साथ भी लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। उनके अनुसार, रंगमंच ने उन्हें अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि और विचारधारा वाले लोगों को समझने की दृष्टि दी। उनका मानना है कि किसी किरदार को निभाने से उसके सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को समझने में मदद मिलती है।
जेएनयू में पढ़ाई के दौरान नेहा वामपंथी छात्र राजनीति से जुड़ीं और AISA में सक्रिय हुईं। वर्ष 2018 से वह विश्वविद्यालय परिसर में छात्र आंदोलनों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भाग ले रही थीं। संगठन में अपनी सक्रियता और नेतृत्व की भूमिका के जरिए वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद तक पहुंचीं। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान जुलाई में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान और व्यापक हुई। उन्होंने जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली के विरोध में आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
इस आंदोलन के दौरान नेहा ने अपने साथियों मनीष कुमार और अमीन अमितोज के साथ 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। प्रदर्शन में पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई जानी-मानी हस्तियां और सांसद भी शामिल हुए थे। लंबे उपवास के दौरान नेहा का वजन लगभग आठ किलोग्राम कम होने की जानकारी दी गई। आंदोलन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। इस विरोध के बाद नेहा को छात्र आंदोलनों में सक्रिय एक चर्चित युवा चेहरे के रूप में पहचान मिली।
अगस्त में वह झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से संबंधित कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों में भी शामिल हुईं। झारखंड विधानसभा के पास प्रदर्शन के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई थी। इसके बाद भी उन्होंने छात्र मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखी।
हाल में नेहा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लिया। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में उनके नेतृत्व की भूमिका रही। इस दौरान “ज्ञानेश, बस हो गया, ब्रो!” जैसे नारे और पोस्टर भी सामने आए। दिल्ली में पुलिस बैरिकेड पार करने और अलग-अलग स्थानों पर पहुंचने से जुड़े उनके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि वह पेशेवर धावक नहीं हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग ने उन्हें दौड़ने के लिए प्रेरित किया। हिरासत के दौरान बस के अंदर से बनाए गए उनके वीडियो भी चर्चा में रहे। सेना में अधिकारी रहे पिता से जुड़ा पारिवारिक परिवेश, रंगमंच का अनुभव और जेएनयू में छात्र राजनीति से जुड़ाव उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख पहलू हैं।
