धराली में धरती में समाए शिव धाम को खोजने की जद्दोजहद शुरू, जानिए पौराणिक इतिहास
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आपदा के 14 महीने बाद मलबे में दबा है कल्प केदार मंदिर
साल 2025 में 5 अगस्त को धराली में आई विनाशकारी आपदा के एक वर्ष दो माह बाद ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए खुदाई शुरू कर दी। मंदिर समिति से जुड़े लोगों के अनुसार इतिहास में चौथी बार कल्प केदार को ढूढ़ने का काम शुरू किया गया है।
ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को खोजने और उसके जीर्णोद्धार की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नवरात्रि के पहले दिन रविवार को गांव के आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए खुदाई शुरू की गई। मंदिर समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, इतिहास में यह चौथी बार है, जब आपदा के बाद कल्प केदार मंदिर की खोज के लिए खुदाई की जा रही है। इससे पहले करीब 100 वर्ष पूर्व आखिरी बार सनृ् 1926 में खुदाई के दौरान कल्प केदार के मुख्य मंदिर को जमीन ने नीचे ढूंढा गया था।
रविवार को नवरात्रि के पहले दिन शुभअवसर पर आपदा प्रभावित धराली गांव के ग्रामीणों ने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में कल्पकेदार मंदिर को मलबे के नीचे ढूढ़ने के लिए खुदाई शुरू कर दी गई है।
बताते चलें कि धराली गांव में कल्प केदार मंदिर को केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन विरासत के रूप में भी देखा जाता है। पिछले वर्ष आई आपदा के दौरान भारी मात्रा में मलबा आने से मंदिर दब गया था। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर करीब 25 फीट नीचे मलबे में दबा हो सकता है। ऐसे में अब ग्रामीणों ने अपनी आस्था और सामूहिक प्रयासों के बल पर मंदिर को फिर से खोजने की मुहिम शुरू की है।

कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार ने बताया कि रविवार को नवरात्रि के पहले दिन मंदिर की खोज के लिए निर्धारित स्थल पर विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान हवन भी किया गया। ग्रामीणों ने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के सानिध्य में पूजा संपन्न कराई। इसके बाद देवता के आदेश के साथ निर्धारित समय पर खुदाई का कार्य शुरू किया गया। फिलहाल ग्रामीण अपने संसाधनों से मलबा हटाने में जुटे हैं।
मंदिर समिति का कहना है कि मंदिर को खोजने के बाद उसके जीर्णोद्धार की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया कि मुख्यमंत्री ने भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की है। जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा।
वहीं समिति के सदस्य संजय पंवार ने बताया कि पुराने बुजुर्ग लोगों के अनुसार सबसे पहले कल्प केदार मंदिर वर्ष 1803 की आपदा के दौरान बाढ़ में बह गया था। उस समय वहां पर करीब 204 मंदिरो का समूह होता था। उसके बाद 1887 में यहां पर तीन मंदिर दिखे थे। वहीं वर्ष 1926 में यहां पर आपदा में मुख्य कल्प केदार मंदिर आधा दब गया था और अन्य छोटे मंदिर बह गए थे। उसके बाद ग्रामीणों ने खुदाई कर पूरे मंदिर को बाहर निकाला था। उसके करीब सौ वर्ष बाद गत वर्ष अगस्त माह में आई आपदा में मंदिर मलबे में करीब 25 फीट नीचे दब गया था। उसे ढूढ़ने की कवायद नवरात्रि के पहले दिन शुरू कर दी गई है।
इसके करीब सौ वर्ष बाद पिछले वर्ष अगस्त में धराली में आई विनाशकारी आपदा ने एक बार फिर मंदिर को मलबे में दबा दिया। इस बार मंदिर के करीब 25 फीट नीचे दबे होने का अनुमान है। अब ग्रामीणों ने नवरात्रि के पहले दिन से इसे खोजने का कार्य शुरू किया है। राली में कल्प केदार मंदिर की खोज के लिए शुरू हुई खुदाई ग्रामीणों के लिए धार्मिक आस्था के साथ अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की कोशिश भी है।
आपदा के बाद गांव के पुनर्वास और जनजीवन को सामान्य बनाने की चुनौतियों के बीच ग्रामीणों ने मंदिर को फिर से सामने लाने का संकल्प लिया है। अब सभी की निगाहें खुदाई के दौरान मंदिर के अवशेष मिलने और उसके बाद जीर्णोद्धार की प्रक्रिया पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों और प्रशासनिक सहयोग से प्राचीन कल्प केदार मंदिर को फिर से उसका स्वरूप दिलाने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।
