Religious Tourism: आज से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खुलेगी पाताल भुवनेश्वर गुफा
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जानें पौराणिक महत्व, यहां लगातार बढ़ रहा है एक शिवलिंग जो बताता है कब खत्म होगी दुनिया
देवभूमि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहट में स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पाताल भुवनेश्वर गुफा के द्वार आज श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए फिर से खुलने जा रहे हैं। करीब दो माह से बंद गुफा के खुलने से देशभर से यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी। गुफा के बंद रहने से धार्मिक पर्यटन पर असर पड़ रहा था। अब इसके दोबारा खुलने से क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने और स्थानीय कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है।
बेरीनाग विकास खंड के क्षेत्र में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक संरचना के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 1,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा चूना पत्थर से बनी एक अद्भुत प्राकृतिक संरचना है। गुफा के भीतर संकरे रास्ते, प्राकृतिक आकृतियां और चट्टानों से बनी विभिन्न संरचनाएं देखने को मिलती हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु इन आकृतियों को धार्मिक मान्यताओं के आधार पर देवी-देवताओं और पौराणिक प्रसंगों से जोड़कर देखते हैं।
पाताल भुवनेश्वर को भगवान शिव के प्रमुख पवित्र स्थलों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस गुफा में भगवान शिव सहित अनेक देवी-देवताओं का वास है। स्कंद पुराण के मानसखंड में भी इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व वर्णित मिलता है। मान्यता है कि गुफा के भीतर दर्शन करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, गुफा के भीतर दिखाई देने वाली प्राकृतिक चट्टानों की आकृतियों को विभिन्न देवी-देवताओं, नागों और पौराणिक पात्रों के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास भी प्रचलित है कि गुफा के दर्शन करना एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव है।
हालांकि, गुफा के भीतर बनी आकृतियां प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं से विकसित हुई हैं और उनकी धार्मिक पहचान आस्था एवं परंपराओं पर आधारित है.गुफा की सबसे खास विशेषता इसका प्राकृतिक स्वरूप है। धरती के भीतर उतरते हुए श्रद्धालुओं को संकरे मार्गों और चट्टानों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। अंदर की प्राकृतिक बनावट इस स्थान को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है। यही कारण है कि यहां धार्मिक पर्यटन के साथ भूगर्भीय संरचनाओं में रुचि रखने वाले पर्यटक भी पहुंचते हैं।
पाताल भुवनेश्वर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग प्रमुख साधन है। यह स्थल पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थित है। पिथौरागढ़, बेरीनाग और अल्मोड़ा की ओर से सड़क मार्ग के माध्यम से यहां पहुंचा जा सकता है। हल्द्वानी और नैनीताल से आने वाले पर्यटक अल्मोड़ा होते हुए बेरीनाग और गंगोलीहाट की ओर यात्रा कर सकते हैं। दिल्ली तथा अन्य मैदानी क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए हल्द्वानी या काठगोदाम तक रेल अथवा सड़क मार्ग से पहुंचना और वहां से आगे टैक्सी या बस से यात्रा करना सुविधाजनक विकल्प है।
पाताल भुवनेश्वर मंदिर कमेटी की अध्यक्ष नीलम भंडारी के अनुसार गुफा खोलने की पूरी तैयारी कर ली गई है। गुफा के आक्सीजन कम होने पर कंसंटेटर मशीन लगाई जायेगी। नवरात्रि शुरू होने के कारण गुफा दर्शन के लिए पहले दिन बड़ी संख्या भक्तों भीड़ होने को लेकर भी सभी तैयारी कर दी गई है।
पाताल भुवनेश्वर गुफा क्षेत्र के पर्यटन कारोबार का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से होटल, होमस्टे, टैक्सी संचालकों, दुकानदारों और स्थानीय अन्य व्यवसायों को रोजगार मिलता है ।करीब दो माह तक गुफा बंद रहने से पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हुईं। अब गुफा खुलने से स्थानीय कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। गुफा के भीतर बरसात के मौसम में आक्सीजन कम होने के कारण पुरातत्व विभाग के अधीन इस गुफा को बंद कर दिया जाता है। इस वर्ष 11 अगस्त से गुफा को बंद कर दिया था, इससे पूर्व गुफा के भीतर सौन्दर्यीकरण कार्य के लिए भी बंद किया था।
