दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में
शनिवार को प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद रविवार को भी विरोध प्रदर्शन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर लोगों को रास्तों पर पाबंदियों के बारे में चेतावनी दी गई है। सुरक्षा प्रबंधों के तहत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में एकत्र हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी।
प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की रिहाई की भी जानकारी सामने आई। रिहा होने के बाद वह अपने घर लौट गए। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की दिल्ली पुलिस के जवानों से बहस हो गई। पुलिस जब उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी, तब दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे भारत के राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश पर ‘काली इमरजेंसी’ थोप दी है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने और दिल्ली मेट्रो के बड़े पैमाने पर बंद रहने का भी उल्लेख किया। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती लोकतांत्रिक इतिहास के लिए बड़ा झटका है। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मेट्रो सामान्य रूप से चले और इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा न आए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से 45 पर ही प्रवेश और निकास पर रोक लगाई गई थी। मेट्रो संचालन को लेकर यह जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र संस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। खड़गे के अनुसार, उन्हें फैसले लेने की पूरी आजादी नहीं मिल रही है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र के साथ धोखे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। प्रदर्शन और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच दिल्ली में सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
