बेगट कला में जीवन जोशी बना रहे नए कलाकारों को हुनरमंद
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कटघरिया में चल रहा प्रेरणादायक प्रशिक्षण शिविर
हल्द्वानी / कटघरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के 122वें एपिसोड में विशेष रूप से सराहे जाने वाले और चर्चा में आए प्रसिद्ध बगैट कलाकार जीवन जोशी आज कला और संस्कृति के संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। वर्तमान में कटघरिया के पास उनके द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का संचालन किया जा रहा है, जहाँ लगभग 25 महिलाएं पूरी तन्मयता से पारंपरिक बेगट कला की बारीकियां सीख रही हैं।
सीमित संसाधनों के बीच हुनर की उड़ान

इस प्रशिक्षण शिविर में व्यवस्थाएं भले ही ना के बराबर हों—जहाँ महिलाएं साधारण लकड़ी और लोहे की टेबल पर बैठकर बेगट कला का प्रशिक्षण ले रही हैं—लेकिन उनका उत्साह और सीखने की ललक देखते ही बनती है। जीवन जोशी खुद एक-एक महिला के पास जाकर उन्हें इस पारंपरिक कला को बारीकी से तराशना सिखा रहे हैं।
इस ट्रेनिंग के तहत महिलाएं बेगट से कई आकर्षक और उपयोगी कलाकृतियों का निर्माण कर रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
– बेगट से एप्पन और एप्पन के पैर
– पारंपरिक सिंहासन
– विविध सजावटी और घरेलू उपयोग की वस्तुएं
मास्टर ट्रेनर जीवन जोशी का उद्देश्य: कला का विस्तार और स्वरोजगार
इस पहल के बारे में बात करते हुए जीवन जोशी ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य इस प्राचीन लोक कला को जन-जन तक पहुँचाना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसकी जानकारी मिल सके।

इसके साथ ही उनका दूसरा सबसे बड़ा लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस पूरी प्रक्रिया की खूबी यह है कि:
– कलाकृतियों को बनाने के लिए आवश्यक सारा कच्चा माल और सामग्री जीवन जोशी स्वयं उपलब्ध कराते हैं।
– इन महिलाओं द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों के बाजार में बिकने पर, उसकी बिक्री से प्राप्त राशि का एक निश्चित प्रतिशत हिस्सा सीधे महिलाओं को दिया जाता है।
– इस ट्रेनिंग का दीर्घकालिक उद्देश्य महिलाओं को इतना दक्ष करना है कि वे अपने घरों से ही बेगट कला की वस्तुएं तैयार कर स्वरोजगार (Self-Employment) अपना सकें।
इस प्रशिक्षण में मुख्य रूप से सोनी उपाध्याय, दीपा जोशी, रीता फत्याल, दीप्ति पाण्डेय, पूजा नेगी, कविता बसेड़ा, जानकी जोशी, ममता भट्ट, भावना, ममता जोशी, नीरू चुफाल, तुलसी, पुष्पा अवस्थी सहित कुल 25 महिलाएं इस कला को सीख रही है।
