October 5, 2026

Uttarakhand Cabinet: चार साल बाद प्रदेश में भूमिधरी अधिकार का रास्ता हुआ साफ

0
Uttarakhand cabinet
  • हजारों लोगों को होगा लाभ

देवभूमि उत्तराखंड में चार साल से भूमिधरी अधिकार मिलने का इंतजार कर रहे पट्टेदारों और कब्जाधारकों के लिए राहत की खबर है। कैबिनेट ने वर्ग-तीन और वर्ग-चार की भूमि के पट्टेदारों-कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इससे नैनीताल के लालकुआं और देहरादून के परगना जौनसार-बावर क्षेत्र में हजारों लोगों को लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

भूमि की कई श्रेणियां हैं। वर्ग-तीन यानी असामी पट्टाधारक के तहत वह भूमि आती है, जिस पर लोग बंदोबस्ती से पहले से काबिज हैं और खतौनियों में उनके नाम दर्ज हैं। वहीं वर्ग-चार के तहत सीलिंग की वह भूमि आती है, जिसका पट्टा लोगों को मिला हुआ है।

कैबिनेट ने नैनीताल के नगर पंचायत लालकुआं में संबंधित पट्टेदारों और कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार प्रदान करने तथा देहरादून जिले के परगना जौनसार-बावर में वर्ग-चार की भूमि के विनियमितीकरण संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। संबंधित भूमि का विनियमितीकरण एक वर्ष तक वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद यह प्रक्रिया प्रचलित सर्किल रेट के अनुसार होगी।

राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इससे प्रदेश के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा। इससे पहले वर्ष 2016 से 2022 तक पट्टेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने की प्रक्रिया चली थी, लेकिन बाद में यह आगे नहीं बढ़ सकी। अब कैबिनेट के फैसले के बाद इसे दोबारा पूरा करने का रास्ता खुल गया है।

सचिव राजस्व एसएन पांडेय ने बताया कि संबंधित लोगों को एक वर्ष तक वर्ष 2004 के सर्किल रेट के हिसाब से निर्धारित राशि जमा करनी होगी। इसके बाद राशि वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर जमा करनी होगी। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

कैबिनेट ने उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली, 1952) में संशोधन को भी मंजूरी दी है। अधिकारियों के अनुसार, एक्ट में किए गए संशोधनों को नियमावली में शामिल किया गया है। इससे भूमिधरी और भूमि संबंधी मामलों की प्रक्रिया में सुविधा होगी।

 

 

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *