शनिवार को पीपल के पेड़ के पास करें ये 4 धार्मिक उपाय, पितृ दोष से राहत की ज्योतिषीय मान्यता
शनिवार की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक जलाने के बाद पितरों का स्मरण कर सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद ‘ॐ सर्व पितृ प्रशनो भवः ओम’ मंत्र का 108 बार जाप करने की मान्यता बताई गई है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और आर्थिक स्थिति में सुधार के रास्ते खुल सकते हैं। दीपक जलाते समय मन में श्रद्धा और शांत भाव रखने को भी महत्वपूर्ण माना गया है। शनिवार की शाम पीपल के पेड़ की जड़ में सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से हनुमान जी और शनिदेव की कृपा मिलने के साथ पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। नियमित रूप से यह उपाय करने से मन को शांति मिलने और नकारात्मक विचारों से राहत मिलने की बात कही जाती है। इसी तरह शनिवार को पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करने का भी धार्मिक महत्व बताया गया है। परिक्रमा के दौरान पीपल के तने पर सूत या सफेद धागा लपेटने की परंपरा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पीपल की पूजा से शनि के साथ राहु और केतु से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिल सकती है। इन्हीं ग्रहों को पितृ दोष से जोड़कर भी देखा जाता है।
शनिवार की सुबह स्नान और पूजा के बाद एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें थोड़े काले तिल मिलाने और इसे पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करने की भी मान्यता है। जल चढ़ाते समय पितरों का ध्यान कर उनकी शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता में काले तिल का पितृ कर्म में विशेष महत्व बताया गया है। पीपल को जल अर्पित करने और पितरों का स्मरण करने से उनकी कृपा मिलने की मान्यता है। इसे आर्थिक परेशानी और जीवन की रुकावट दूर करने वाला उपाय भी माना जाता है। इन उपायों में नियमितता को विशेष महत्व दिया गया है और अपनी सुविधा व श्रद्धा के अनुसार किसी एक उपाय को लगातार सात शनिवार तक करने की बात कही गई है।
पूजा के दौरान पीपल के पेड़ की स्वच्छता और आसपास के वातावरण का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपाय करते समय मन में श्रद्धा बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इन सभी उपायों का आधार ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं हैं। इसलिए इन्हें आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार ही अपनाने की बात कही गई है। पितृ दोष से जुड़े इन उपायों को धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है और इनके परिणामों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण का दावा नहीं किया गया है।
