जी7 देश जारी करेंगे 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल, अगले चार महीनों में होगी आपूर्ति
नई दिल्ली: जी7 और उसके साझेदार देश अपने इमरजेंसी भंडार से करीब 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करेंगे। यह फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच लिया गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति और जी7 के मौजूदा चेयरमैन इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि जी7 ईंधन की कीमतों में कमी लाना चाहता है। इसके तहत अगले चार महीनों में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की देखरेख में रणनीतिक भंडार से आपूर्ति जारी की जाएगी।
यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका ने संकेत दिया है कि अगर यूरोपीय देशों ने अपने भंडार से और आपूर्ति जारी नहीं की, तो डीजल निर्यात पर भारी असर डालने वाला प्रतिबंध लगाया जा सकता है। ऐसा कदम यूरोप के लिए आपूर्ति के एक महत्वपूर्ण स्रोत को प्रभावित कर सकता है। यूरोपीय महाद्वीप डीजल उत्पादन में कमी को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। जी7 देशों का यह कदम बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया है।
ईरान युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद आईईए ने मार्च में 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की योजना बनाई थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने इन बैरल को अपेक्षित तेजी से उपलब्ध नहीं कराया। जी7 के एक बयान से संकेत मिला है कि अब जारी किए जाने वाले 100 मिलियन बैरल में वे बैरल भी शामिल हो सकते हैं, जो मार्च में जारी किए गए स्टॉक के तहत अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
मैक्रों ने कहा कि सभी देशों ने मिलकर उन अनुपातों के अनुसार रणनीतिक भंडार जारी करने का संकल्प लिया है जिनका उन्होंने उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि इसमें डीजल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, सभी देश यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि निर्यात पर कोई रोक न लगे। इस कदम का उद्देश्य ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों में कमी लाने की कोशिश करना है। अगले चार महीनों के दौरान होने वाली आपूर्ति की निगरानी आईईए करेगा।
हालांकि, जी7 और उसके साझेदार देशों की ओर से इमरजेंसी भंडार से तेल और डीजल जारी करने के फैसले के बाद भी कच्चे तेल की कीमत में कोई खास कमी नहीं आई। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ। इस तरह करीब 100 मिलियन बैरल की प्रस्तावित आपूर्ति के बावजूद बाजार में कच्चे तेल की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी रही। फैसला बढ़ती ईंधन कीमतों और डीजल की आपूर्ति को लेकर बने दबाव के बीच लिया गया है।
