October 3, 2026

Navratri 2026 Date: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना का मिलेगा विशेष अवसर

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नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र 2026 इस बार एक विशेष ज्योतिषीय संयोग के कारण चर्चा में हैं। मां दुर्गा की आराधना का यह पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होगा और पूरे 10 कैलेंडर दिनों तक चलेगा। पंचांग की गणना के अनुसार करीब 50 वर्षों में छठी बार ऐसा संयोग बन रहा है जब तिथि के विस्तार के कारण नवरात्र की अवधि सामान्य से अधिक होगी। इस दौरान अष्टमी तिथि दो दिन पड़ने के कारण पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का कार्यक्रम भी खास रहेगा। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में मां भगवती की उपासना करेंगे और पूरे विधि-विधान से घटस्थापना कर नवरात्र की शुरुआत करेंगे।

काशी के विद्वान ज्योतिषियों के अनुसार जब किसी तिथि की अवधि एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बाद तक बनी रहती है तो पंचांग की गणना में उसका प्रभाव लगातार दो दिनों तक माना जा सकता है। इसी तरह तिथि के विस्तार से इस बार नवरात्र की अवधि 10 कैलेंडर दिनों की हो रही है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर सुभाष पांडेय के अनुसार नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग बन रहा है। इस वजह से घटस्थापना के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व रहेगा।

पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह नहीं बल्कि दोपहर में निर्धारित किया गया है। कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को पूजा संकल्प और घटस्थापना के लिए कुल 48 मिनट का समय मिलेगा। जो भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं वे इस अवधि में विधि-विधान से कलश स्थापित कर पूजा आरंभ कर सकते हैं। हालांकि स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग से भी जानकारी लेनी चाहिए।

तिथियों की गणना के मुताबिक 18 अक्टूबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी जबकि 19 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 53 मिनट तक अष्टमी का प्रभाव बना रहेगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी जो 20 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसी कारण इस बार नवरात्र का कैलेंडर दस दिनों का होगा। पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दिन नवरात्र के समापन के साथ दशहरा पर्व का धार्मिक महत्व भी रहेगा। कन्या पूजन और व्रत पारण करने वाले श्रद्धालुओं को तिथि और स्थानीय परंपरा के अनुसार समय का ध्यान रखना होगा।

इस बार मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान को लेकर भी ज्योतिषीय मान्यताओं में विशेष चर्चा है। शास्त्रीय गणना के अनुसार रविवार से नवरात्र शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी पर देवी के आगमन को अच्छी वर्षा और अतिवृष्टि के संकेत से जोड़ा जाता है। वहीं देवी का प्रस्थान मुर्गे पर होने की मान्यता है जिसे कुछ परंपराओं में जनमानस की व्याकुलता और अशांति से जोड़कर देखा जाता है। ये ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं इन्हें निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

नवरात्र के दौरान भक्त मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। घरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है और मंदिरों में विशेष श्रृंगार भजन कीर्तन तथा धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई आराधना से जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस तरह 2026 का शारदीय नवरात्र तिथि विस्तार शुभ मुहूर्त और विशेष धार्मिक मान्यताओं के कारण भक्तों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है।

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