आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर हाईकोर्ट की सख्ती, सरकार ने बताया 6 महीने में 15 हजार का आंकड़ा, 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसिल्वा ने सरकार की ओर से पेश की गई कार्रवाई और इंतजामों को संतोषजनक बताया। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर को सरकार की रिपोर्ट पर विस्तार से विचार किया जाएगा और जरूरत के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।
दरअसल आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई निर्देश जारी कर चुका है। 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे से जुड़े दिशा निर्देश दिए थे। इसके बाद 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट को इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने को कहा था। शीर्ष अदालत ने इस समस्या के समाधान तक मामले की लगातार निगरानी करने के निर्देश भी दिए थे। इसी क्रम में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी मामले को संज्ञान में लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा।
हाईकोर्ट के सामने सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है। सरकार के अनुसार पिछले छह महीनों के दौरान 15 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया है। सरकार ने सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा और कुत्तों के नियंत्रण से जुड़े दूसरे उपायों की जानकारी भी अदालत के सामने रखी।
सरकार ने कचरा प्रबंधन और आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर भोजन मिलने की समस्या को लेकर भी कदम उठाने की बात कही है। खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडरों को खाद्य अपशिष्ट का उचित निपटान करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्हें कचरा बंद डस्टबिन में रखने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही खान-पान के स्टॉल के आसपास आवारा कुत्तों को भोजन नहीं कराने के लिए भी कहा जा रहा है।
अब हाईकोर्ट 3 नवंबर को सरकार की ओर से पेश आंकड़ों और उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा। इसके बाद अदालत की ओर से जरूरी निर्देश जारी किए जा सकते हैं। हाईकोर्ट की रिपोर्ट आगे सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी और 17 नवंबर को शीर्ष अदालत में इस मामले पर आगे की सुनवाई होगी।
