MP में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग पर भोपाल में बढ़ा तनाव
प्रदर्शन को देखते हुए भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। चुनाव आयोग के कार्यालय तक प्रदर्शनकारियों को पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस नेताओं ने पार्टी कार्यालय के सामने सभा भी की। इसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ कई विधायक और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता शामिल हुए।
कांग्रेस का यह आंदोलन SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि मध्य प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से 34 लाख 25 हजार 78 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। कांग्रेस इन बदलावों को लेकर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रही है।
विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है। हाल में सामने आई जानकारी के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मामलों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े विषय शामिल थे।
इन घटनाक्रमों के बाद विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाए गए और उनके इस्तीफे की मांग तेज हुई। कांग्रेस ने भी इसी मुद्दे को लेकर भोपाल में अपना प्रदर्शन आयोजित किया और स्वतंत्र जांच की मांग सामने रखी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि चुनाव आयुक्तों द्वारा किसी विषय पर व्यक्तिगत टिप्पणी, सुझाव या आपत्ति दर्ज करना निर्णय में असहमति के समान नहीं है। आयोग के मुताबिक SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इस पूरे विवाद पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट, लोकतंत्र और चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री ने संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के आरोप संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
भोपाल में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने SIR से जुड़े अपने सवालों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस बीच चुनाव आयोग की ओर से SIR और अन्य फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में मध्य प्रदेश में SIR को लेकर कांग्रेस के आरोप और सरकार का जवाब आमने-सामने हैं, जबकि भोपाल में हुआ प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद के और तेज होने का संकेत देता है।
