मोटर इंश्योरेंस खरीदने वालों को मिल सकते हैं ज्यादा विकल्प, IRDAI के प्रस्ताव से डीलर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने मोटर इंश्योरेंस की बिक्री और कमीशन व्यवस्था को लेकर एक पब्लिक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें मोटर इंश्योरेंस से जुड़े कमीशन और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई है। नियामक के अनुसार अलग-अलग मामलों में मोटर इंश्योरेंस पर कमीशन 13 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक हो सकता है, जबकि औसत करीब 24 प्रतिशत बताया गया है।
नए और पुराने वाहनों की बिक्री से जुड़े ब्रोकर्स और मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स के माध्यम से वित्त वर्ष 2025 में करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया गया। इसमें करीब 7,050 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर गया। प्रस्ताव में इस बात पर विचार किया गया है कि अपेक्षाकृत सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर इतनी ऊंची कमीशन लागत कितनी उचित है।
प्रस्तावित व्यवस्था में ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नए और पुराने वाहनों के इंश्योरेंस उत्पादों तक पहुंच देने की बात कही गई है। इससे ग्राहक अलग-अलग विकल्पों की जानकारी ले सकेंगे और डीलर से अलग माध्यम के जरिए पॉलिसी खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे गैर-लाभकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लागत वसूलने के लिए प्रीमियम का अधिकतम पांच प्रतिशत शुल्क रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
अगर प्रस्ताव लागू होते हैं तो वाहन डीलरों को ग्राहकों के सामने डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकल्प और क्यूआर कोड स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य ग्राहक को यह जानकारी देना है कि इंश्योरेंस खरीदने के लिए केवल डीलर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है।
वाहन लोन के साथ इंश्योरेंस की बिक्री को लेकर भी प्रस्ताव में ध्यान दिया गया है। लोन और बीमा की बंडलिंग से जुड़े मामलों में करीब 16 प्रतिशत कमीशन देखे जाने का उल्लेख किया गया है। प्रस्तावित बदलावों में ग्राहक को लोन लेते समय इंश्योरेंस की कीमत और उसे खरीदने के माध्यम की स्पष्ट जानकारी देने पर जोर है।
पुराने वाहनों के बीमा में भी कमीशन व्यवस्था की समीक्षा की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक कई डीलरों के पास सर्विस और रिपेयर की सुविधाएं होने के बावजूद पुराने वाहनों के इंश्योरेंस पर मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स को औसतन करीब 12 प्रतिशत कमीशन मिलता है।
कैशलेस रिपेयर को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। यदि ग्राहक ने किसी दूसरे बीमाकर्ता से पॉलिसी खरीदी है और उसमें कैशलेस रिपेयर की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल इस आधार पर डीलर सुविधा से इनकार नहीं कर सकेगा कि बीमा उसी डीलर से नहीं लिया गया।
इसके अलावा पॉलिसी बिक्री के आधार पर अतिरिक्त इंसेंटिव देने वाली कुछ व्यवस्थाओं पर रोक का प्रस्ताव है। अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा और सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों पर कम कमीशन रखने की भी बात कही गई है।
हालांकि, ये बदलाव अभी लागू नहीं हुए हैं। संबंधित प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करके आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसलिए फिलहाल मोटर इंश्योरेंस की मौजूदा व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं माना जा सकता।
