भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर 2026 तक भारत समुद्री बीमा पूल ने 3000 माल युद्ध-जोखिम पॉलिसी जारी की थीं। इसके अलावा 92 जलपोत ढांचा युद्ध-जोखिम पॉलिसी और तीन संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति यानी पीएंडआई बीमा पॉलिसी भी जारी की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य समुद्री व्यापार से जुड़े भारतीय पक्षकारों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
भारत समुद्री बीमा पूल भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ उन जहाजों से जुड़े जोखिमों के लिए समुद्री बीमा उपलब्ध कराता है, जिनका स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण भारतीय संस्थाओं के पास है। इसके दायरे में भारत से आने या भारत से शुरू होने वाले माल को ले जाने वाले पोत भी शामिल हैं।
इस पूल की शुरुआत मई 2026 में 13,906.50 करोड़ रुपये यानी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक के कवरेज के साथ की गई थी। इसके जरिए जहाज के ढांचे, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति और युद्ध से जुड़े जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। इसका एक उद्देश्य विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और वैश्विक व्यवधानों के दौरान भारतीय समुद्री कारोबार को निरंतर बीमा सुरक्षा देना है।
इस व्यवस्था के तहत बीमा पॉलिसियां घरेलू बीमा कंपनियों द्वारा जारी की जाती हैं। जोखिमों का पुनर्बीमाकरण सदस्यों की प्रतिबद्धताओं के आधार पर सामूहिक रूप से किया जाता है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान आरक्षित निधियों के माध्यम से किया जाता है, जबकि इससे बड़े दावों के लिए संप्रभु गारंटी का प्रावधान रखा गया है।
भारत समुद्री बीमा पूल के माध्यम से तटीय जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम और पीएंडआई पॉलिसियां भी जारी की गई हैं। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिमों को कम करने के साथ बीमा लागत को नियंत्रित रखना और देश की समुद्री वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।
बीमा कवरेज के तहत जहाज के मुख्य ढांचे, उसे चलाने वाली मशीनरी और उसमें लगे उपकरणों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती है। इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों में लगी पूंजी को बीमा सुरक्षा मिलती है और इस तरह के जोखिमों के लिए घरेलू बीमा व्यवस्था मजबूत होती है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से भेजे जाने वाले माल को नुकसान या खराब होने के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है। विशेष रूप से ऐसे समुद्री रास्तों पर यह कवरेज महत्वपूर्ण है, जहां जोखिम सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक रहता है। इससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को अपने माल की सुरक्षा के लिहाज से सहायता मिलती है।
युद्ध-जोखिम बीमा में सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन के जहाज द्वारा कब्जे जैसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को भी शामिल किया गया है। लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय व्यापारिक मार्गों के लिए इस तरह की सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारत समुद्री बीमा पूल को देश की समुद्री वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े पक्षकारों को भरोसेमंद संचालन, प्रतिस्पर्धी बीमा दरों और दावों के निपटान की विश्वसनीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
