September 28, 2026

उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नया कदम, CM मोहन यादव ने महाकाल लोक थाने का किया लोकार्पण

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उज्जैन: में श्रद्धालुओं और शहरवासियों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को बढ़ाने की दिशा में नई शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को महाकाल लोक स्थित अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर से पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने शक्ति पथ से बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रों का वाचन किया और डमरू वादन भी हुआ।

उज्जैन में शुरू की गई यह सेवा श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को शहर के प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जाएगी। पहले चरण में धार्मिक पर्यटन के लिए 10 इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन बसों के जरिए यात्रियों को एक ही निर्धारित मार्ग पर उज्जैन के कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को पूरा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि करीब 21 साल पहले राज्य परिवहन निगम की बसें संचालित होती थीं, लेकिन बाद में सार्वजनिक बस सेवा बंद हो गई थी। अब इस कमी को दूर करने के लिए परिवहन व्यवस्था को दोबारा विस्तार दिया जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत शहर के भीतर नगरीय बस सेवाओं के साथ दूसरे शहरों और राज्यों तक बस कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना भी बताई गई है। उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए 10 बसों से शुरुआत की गई है। आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के साथ यात्रियों को अन्य मार्गों पर भी सुविधा मिल सकती है। प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के जरिए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है।

उज्जैन दर्शन सेवा का निर्धारित मार्ग मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा। यहां से बस महाकाल लोक पहुंचेगी। इसके बाद यात्रियों को हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर और सिद्धवट मंदिर तक ले जाया जाएगा।

इसके बाद मार्ग में अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बस स्टैंड और उज्जैन रेलवे स्टेशन शामिल होंगे। यात्रा पूरी होने के बाद बस दोबारा मेघदूत वन पार्किंग पहुंचकर निर्धारित चक्र पूरा करेगी।

उज्जैन दर्शन सेवा के लिए यात्रियों को 200 रुपये शुल्क देना होगा। भुगतान के लिए यूपीआई की सुविधा उपलब्ध रहेगी। बसों को इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित रखा गया है, जिससे इनके संचालन के दौरान सीधे तौर पर ईंधन आधारित उत्सर्जन नहीं होगा। इससे धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।

उज्जैन में पहले चरण में 10 ई-बसों से सेवा शुरू की गई है। शहर के लिए कुल 100 इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की जा रही है और इनके लिए मक्सी रोड स्थित पुराने डिपो में चार्जिंग से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में बसों की संख्या बढ़ने के साथ शहर के अन्य निर्धारित मार्गों पर भी ई-बस सेवा का विस्तार किया जाना है।

इस नई सेवा से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को एक ही बस रूट के जरिए कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा। वहीं स्थानीय नागरिकों के लिए भी शहर में सार्वजनिक परिवहन का एक आधुनिक माध्यम उपलब्ध होगा। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से धार्मिक पर्यटन और शहरी परिवहन व्यवस्था को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

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