पितृ पक्ष 2026 में इन 10 कामों से रहें दूर, 27 सितंबर से शुरू श्राद्ध पक्ष में रखें इन बातों का ध्यान
पितृ पक्ष के दौरान आम तौर पर सादगी, सात्विक भोजन, संयम और शांत वातावरण को महत्व दिया जाता है। कई परिवार इस अवधि में मांसाहार, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी रखते हैं। भोजन बनाते समय स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की परंपरा भी है।
कई परिवारों में पितृ पक्ष के दौरान बाल और नाखून काटने से बचने की मान्यता है। कुछ लोग पूरे श्राद्ध पक्ष में इसका पालन करते हैं, जबकि अन्य परिवारों में ऐसा नियम नहीं होता। इसलिए इस मामले में अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दी जा सकती है।
इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक कार्यक्रमों को टालने की परंपरा भी कई परिवारों में है। पितृ पक्ष को मुख्य रूप से पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित समय माना जाता है, इसलिए बड़े शुभ कार्यों की शुरुआत इसके बाद करने की मान्यता है।
श्राद्ध पक्ष में घर का माहौल शांत रखने पर भी जोर दिया जाता है। अनावश्यक विवाद, गुस्सा और कलह से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही बुजुर्गों, जरूरतमंदों और अन्य लोगों का अपमान न करने की परंपरा बताई जाती है। अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र या जरूरी सामान का दान और सेवा करना भी इस अवधि से जोड़ा जाता है।
पितृ पक्ष में झूठ, छल-कपट और गलत तरीके से धन कमाने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान व्यक्ति को अपने व्यवहार में संयम रखना चाहिए और अच्छे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
श्राद्ध के लिए तैयार किए गए भोजन की बर्बादी से भी बचना चाहिए। जरूरत के अनुसार भोजन तैयार करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा कई जगहों पर है। अन्न का सम्मान करने और उसे व्यर्थ न गंवाने पर जोर दिया जाता है।
श्राद्ध की तिथि तय करते समय संबंधित हिंदू तिथि को महत्व दिया जाता है। सामान्य अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख के बजाय जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ था, उसके अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है। तिथि को लेकर भ्रम होने पर स्थानीय पंचांग की सहायता ली जा सकती है।
पितृ पक्ष 2026 में 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन होगा। तिथि क्षय के कारण दोनों श्राद्ध एक साथ पड़ रहे हैं। वहीं 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी। जिन पितरों की निर्धारित श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारण से उस दिन श्राद्ध नहीं हो पाया, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है।
पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियों में 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 सितंबर को प्रतिपदा, 28 को द्वितीया, 29 को तृतीया, 30 को चतुर्थी-पंचमी, 1 अक्टूबर को षष्ठी, 2 को सप्तमी, 3 को अष्टमी, 4 को नवमी, 5 को दशमी, 6 को एकादशी, 7 को द्वादशी, 8 को त्रयोदशी, 9 को चतुर्दशी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या शामिल है।
