September 25, 2026

SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले

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नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स (PMS) के निवेश का दायरा बढ़ेगा। अब विदेशी लिस्टेड शेयर, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज जैसे विकल्प भी उनके निवेश दायरे में आ सकेंगे। इसके साथ ही IPO, प्राइमरी मार्केट डेट, FPI, REIT-InvIT, विज्ञापन और सेटलमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। SEBI ने 2026 के नए PMS रेगुलेशन को मंजूरी दी है।

PMS के जरिए निवेश के विकल्प बढ़ेंगे
SEBI ने 2020 के पुराने नियमों की जगह 2026 के नए पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशन को मंजूरी दी है। इसके बाद PMS के लिए निवेश के विकल्प बढ़ जाएंगे। तय नियमों और सीमाओं के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स विदेशी लिस्टेड शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे।

क्लाइंट की मंजूरी मिलने पर पोर्टफोलियो मैनेजर उसके कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10% तक इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज में भी लगा सकेगा।

IPO और प्राइमरी मार्केट में भी निवेश
नए नियमों के तहत PMS के लिए IPO और प्राइमरी मार्केट डेट में निवेश का रास्ता भी खुला है। इसका मतलब है कि PMS के जरिए अपना पैसा मैनेज कराने वाले निवेशकों के लिए नए शेयर जारी होने के समय निवेश का विकल्प उपलब्ध होगा।

भारतीय म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान स्कीमों में निवेश की भी अनुमति दी गई है। इनमें ETF, इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड शामिल हैं। इस सुविधा के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपए रखी गई है।

PMS के नियमों का आकार भी हुआ छोटा
SEBI ने निवेश के विकल्प बढ़ाने के साथ नियमों को आसान बनाने पर भी जोर दिया है। नए PMS नियमों का दस्तावेज 70 पेज से घटाकर 33 पेज कर दिया गया है। SEBI के मुताबिक, इसमें शब्दों की संख्या भी करीब 42% कम की गई है।

इसके अलावा इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर का नया कॉन्सेप्ट भी मंजूर किया गया है। ऐसे फंड मैनेजर रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ मिलकर क्लाइंट का पोर्टफोलियो संभाल सकेंगे। हालांकि, उनके काम की जिम्मेदारी और देनदारी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर की ही रहेगी।

प्रिंसिपल ऑफिसर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में भी राहत दी गई है। वहीं, 100 करोड़ रुपए से कम AUM वाले पोर्टफोलियो मैनेजर्स को डीलिंग रूम की अनिवार्य शर्त से छूट मिलेगी। हालांकि, उन्हें ऑडिट ट्रेल और मजबूत इंटरनल कंट्रोल बनाए रखना होगा।

FPI को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में नया विकल्प
SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के लिए भी निवेश का दायरा बढ़ाया है। अब FPI फिजिकली सेटल्ड नॉन-एग्रीकल्चर कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे।

इनमें ऐसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस शामिल होते हैं, जिनका अंतर्निहित मूल्य कृषि उत्पादों के बजाय अन्य कच्चे माल, धातुओं या ऊर्जा स्रोतों से जुड़ा होता है। हालांकि, इसके लिए समयसीमा तय की गई है। FPI को टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले और एक्सपायरी से कम से कम तीन दिन पहले अपनी पोजिशन खत्म करनी होगी।

5 करोड़ की संपत्ति वाले व्यक्ति भी बन सकेंगे Accredited Investor
SEBI ने Accredited Investor की कैटेगरी का दायरा भी बढ़ाया है। अब सिक्योरिटीज मार्केट में 5 करोड़ रुपए की संपत्ति रखने वाले व्यक्तिगत निवेशक और 20 करोड़ रुपए की संपत्ति वाले बॉडी कॉरपोरेट्स भी कुछ मौजूदा आय और नेटवर्थ शर्तें पूरी करने पर इस कैटेगरी में शामिल हो सकेंगे।

Accredited Investor ऐसे निवेशकों की श्रेणी है, जिन्हें कुछ विशेष निवेश विकल्पों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय क्षमता वाला माना जाता है। SEBI ने अगस्त 2026 में इस फ्रेमवर्क की समीक्षा से जुड़ा कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया था।

सेलिब्रिटी के वित्तीय विज्ञापनों पर नए नियम
वित्तीय कंपनियों और मार्केट इंटरमीडियरी के विज्ञापनों में सेलिब्रिटी की भूमिका को लेकर भी नियम बदले गए हैं। SEBI ने Common Advertisement Code को मंजूरी दी है।

इसके तहत कोई सेलिब्रिटी किसी ब्रांड या कंपनी का प्रचार कर सकता है, लेकिन किसी खास वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस को सीधे एंडोर्स नहीं कर सकेगा। यानी वह किसी कंपनी के विज्ञापन में नजर आ सकता है, लेकिन निवेशकों से किसी विशेष वित्तीय प्रोडक्ट को खरीदने या उसमें पैसा लगाने की अपील नहीं कर सकेगा। इस विषय पर SEBI ने जून 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया था।

10 लाख रुपए तक के मामलों में फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट
शेयर बाजार से जुड़े विवादों और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सेटलमेंट प्रक्रिया को भी बदला गया है। SEBI ने सेटलमेंट अमाउंट तय करने का नया फॉर्मूला मंजूर किया है।

10 लाख रुपए तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट का रास्ता होगा। गलत तरीके से कमाई गई रकम, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली अलग से तय होगी। नए फॉर्मूले का उद्देश्य सेटलमेंट राशि तय करते समय एक ही नुकसान या रकम की दो बार गणना की समस्या को दूर करना है।

SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, FY24-25 में सेटलमेंट के 703 आवेदन आए थे। FY25-26 में 439 आवेदन आए और 170 मामलों का निपटारा हुआ। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच BSE के इलिक्विड स्टॉक ऑप्शंस में गैर-असली ट्रेड से जुड़े मामलों के लिए चौथी सेटलमेंट स्कीम, 2026 को भी मंजूरी दी गई है।

REIT और InvIT के लिए विदेशी फंड जुटाने का रास्ता
SEBI ने REIT और पब्लिकली लिस्टेड InvIT से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब ये मंजूर विदेशी बाजारों में डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी कर सकेंगे। इससे इन साधनों के लिए विदेशी निवेश जुटाने का एक नया माध्यम उपलब्ध हो सकता है। REIT और InvIT से जुड़े नियमों को आसान बनाने के लिए SEBI ने अगस्त 2026 में अलग-अलग कंसल्टेशन पेपर भी जारी किए थे।

वोटिंग नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब 75% आउटस्टैंडिंग यूनिट्स की जगह डाले गए वोट्स का 75% होना पर्याप्त होगा। स्पॉन्सर बदलने की स्थिति में एग्जिट ऑफर के नियमों में भी बदलाव किया गया है और असहमत यूनिटहोल्डर्स के साथ व्यवहार को स्पष्ट किया गया है।

रिसर्च एनालिस्ट और वॉल्ट मैनेजर के नियमों में बदलाव
SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च एंटिटीज के लिए कुछ कंप्लायंस नियमों को भी आसान किया है। संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग रखने से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है।

वहीं, वॉल्ट मैनेजर्स के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा 50 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपए कर दी गई है। नए नियमों में स्टोरेज, सुरक्षा, इंश्योरेंस, गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया गया है। वॉल्ट मैनेजर्स के नियमों में गोल्ड और सिल्वर ETF तथा बुलियन डेरिवेटिव्स से जुड़े बुलियन को भी शामिल किया गया है।

इस तरह SEBI के हालिया फैसलों में एक तरफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स और कुछ निवेशकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ाए गए हैं, वहीं विज्ञापन, सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और अनुपालन से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया गया है।

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