September 23, 2026

धधकती धूनी में सोना चांदी और 1.51 लाख किलो सामग्री जानिए दादा धूनी दरबार के महायज्ञ की कहानी

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रायसेन  । मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के उदयपुरा स्थित दादा धूनी दरबार में हुआ 51 दिवसीय महायज्ञ इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। धार्मिक आयोजन की खासियत इसकी लंबी अवधि के साथ साथ इसमें अर्पित की गई विशाल मात्रा में हवन सामग्री और सोने चांदी के आभूषण बताए जा रहे हैं। आयोजकों के अनुसार इस महायज्ञ में करीब 1 लाख 51 हजार किलो सामग्री धूनी में अर्पित की गई। इसमें फल फूल मिठाई कपड़े और 251 प्रकार की जड़ी बूटियां शामिल थीं। इसके अलावा करीब डेढ़ किलो सोना और 4 से 5 किलो चांदी के आभूषण भी धूनी में अर्पित किए जाने का दावा किया गया है।

यह धार्मिक अनुष्ठान 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शुरू हुआ था और 17 सितंबर तक चला। 51 दिनों तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही गई है। आयोजन से जुड़े संत शिवानंद महाराज के अनुसार यहां लगातार धार्मिक अनुष्ठान के साथ श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था भी की गई। बताया गया कि कई अवसरों पर भक्तों के लिए 24 घंटे भंडारे की व्यवस्था रही।

महायज्ञ में सबसे ज्यादा चर्चा सोने और चांदी की आहुति को लेकर हो रही है। संत शिवानंद महाराज के अनुसार श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित किए गए सोने और चांदी के आभूषणों को धूनी में समर्पित किया गया। उनकी मान्यता के मुताबिक धूनी को मां नर्मदा के स्वरूप के तौर पर देखा जाता है और सोना चांदी तथा अन्य सामग्री इसमें श्रृंगार और श्रद्धा के रूप में अर्पित की जाती है। उनका कहना है कि धूनी में अर्पित सामग्री से बनी भस्म को बाद में मां नर्मदा में विसर्जित किया जाता है। इन धार्मिक मान्यताओं और सामग्री की मात्रा से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।

इस आयोजन की एक और खास बात 251 प्रकार की जड़ी बूटियों का इस्तेमाल बताया गया है। आयोजकों के मुताबिक फल फूल मिठाई वस्त्र और अन्य सामग्री के साथ इन जड़ी बूटियों को भी यज्ञ में अर्पित किया गया। इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री के इस्तेमाल के कारण यह आयोजन अपने विशाल स्वरूप को लेकर भी चर्चा में आया है।

संत शिवानंद महाराज ने आयोजन को लेकर किसी व्यक्ति या संस्था से चंदा अथवा आर्थिक सहयोग नहीं लेने का दावा किया है। उनका कहना है कि यह पूरा आयोजन दादा धूनी वाले महाराज और मां नर्मदा की कृपा से संपन्न हुआ। उन्होंने इसी आयोजन को लेकर एक चुनौती भी दी है। उनके मुताबिक यदि दुनिया में कोई व्यक्ति या संस्था इसी तरह का आयोजन कराकर दिखाती है तो वह उसे 21 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार देंगे।

महायज्ञ के बाद अब 21 दिनों का विशेष नर्मदा संकीर्तन चल रहा है जो 8 अक्टूबर तक जारी रहने की जानकारी सामने आई है। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार धार्मिक गतिविधियां और भंडारे भी इस दौरान जारी रहेंगे। संत शिवानंद महाराज को इस आयोजन के लिए इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र मिलने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। हालांकि रिकॉर्ड से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं हुई है।

दादा धूनी दरबार का यह आयोजन इसलिए भी लोगों का ध्यान खींच रहा है क्योंकि इसमें धार्मिक आस्था के साथ बड़ी मात्रा में सामग्री अर्पित किए जाने की बात सामने आई है। सोना चांदी जड़ी बूटियां और हजारों क्विंटल अन्य सामग्री को लेकर किए गए दावे ने इस महायज्ञ को चर्चा में ला दिया है। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आस्था और धार्मिक परंपरा से जुड़ा विषय है जबकि इसके अलग अलग दावों को आयोजकों के कथन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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