23 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा हलचल के बीच Sensex Nifty पर रहेगी नजर जानें किन संकेतों से तय होगी बाजार की चाल
अब 23 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट के संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी। हाल के सत्रों में क्रूड की कीमतों में उतार चढ़ाव भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बनकर सामने आया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बदलाव का असर महंगाई और कंपनियों की लागत से लेकर निवेशकों की धारणा तक दिखाई दे सकता है। मंगलवार को भी बाजार पर क्रूड और भू राजनीतिक घटनाक्रम का असर नजर आया।
निफ्टी के स्तरों की बात करें तो 23 सितंबर को कारोबार के दौरान 23300 के आसपास का स्तर बाजार की नजर में रह सकता है। इसके ऊपर टिकाव बाजार में स्थिरता का संकेत दे सकता है जबकि कमजोरी बढ़ने पर निवेशकों की नजर अगले सपोर्ट स्तरों पर जा सकती है। इससे पहले 21 सितंबर को निफ्टी 23414.30 पर बंद हुआ था और बाजार में खरीदारी का रुख देखने को मिला था। उस सत्र में सेंसेक्स 564 अंक चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ था।
बाजार की दिशा तय करने में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। विदेशी पूंजी का प्रवाह बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकता है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी कई बार गिरावट के दौरान सहारा देने का काम करती है। ऐसे में 23 सितंबर को निवेशकों की नजर एफआईआई और डीआईआई के आंकड़ों पर भी रहेगी।
सेक्टोरल स्तर पर आईटी शेयरों की गतिविधि खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। मंगलवार को आईटी इंडेक्स में कमजोरी दर्ज की गई थी। इसके अलावा बैंकिंग ऑटो फार्मा मेटल और एनर्जी शेयरों में भी स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। बाजार में किसी एक सेक्टर की चाल पूरे इंडेक्स की दिशा को प्रभावित कर सकती है।
इस समय निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना पर्याप्त नहीं होगा। अमेरिकी बाजारों की स्थिति एशियाई बाजारों का रुख डॉलर की चाल बॉन्ड यील्ड कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सभी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती हैं। सोमवार को वैश्विक संकेतों और तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली थी लेकिन मंगलवार को बाजार फिर दबाव में आ गया। इससे साफ है कि मौजूदा दौर में बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।
23 सितंबर को निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की शुरुआती चाल के साथ प्रमुख स्तरों और सेक्टरवार गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। शेयर बाजार में किसी भी दिशा की गारंटी नहीं होती इसलिए निवेश का फैसला अपने जोखिम और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार करना जरूरी है। आने वाले कारोबार में वैश्विक संकेत और घरेलू घटनाक्रम मिलकर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।
