विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी तरुणा वर्मा ने 80 के दशक की यादें कीं साझा, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर जिंदगी को बताया खास
तरुणा वर्मा ने अपने पति विकास दिव्यकीर्ति की तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि यह तस्वीर वास्तव में 80 के दशक की नहीं, बल्कि वर्तमान समय की है। इसके साथ उन्होंने उस दौर को याद किया, जब लोगों की जिंदगी मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी सुविधाओं से पूरी तरह दूर थी।
उन्होंने अपने पोस्ट में उस समय के जीवन को याद करते हुए लिखा कि आज यह सोचकर हैरानी होती है कि बिना मोबाइल और सोशल मीडिया के लोग किस तरह अपनी जिंदगी बिताते थे। उस दौर में फोन पर लगातार समय बिताने की आदत नहीं थी और लोगों के पास एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ज्यादा मौके होते थे।
तरुणा वर्मा ने बचपन के दिनों को याद करते हुए गर्मियों की दोपहर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि घरवालों के मना करने के बावजूद बच्चे छिपकर अपनी सहेलियों के साथ खेलने निकल जाते थे। तेज धूप के बावजूद खेल-कूद का उत्साह कम नहीं होता था और बच्चों का ध्यान अपनी त्वचा या धूप से होने वाले बदलावों पर नहीं रहता था।
उन्होंने उस समय और आज के दौर के बीच अंतर को अपने अंदाज में सामने रखा। उनके मुताबिक, पहले चेहरे पर दाग-धब्बे होने जैसी बातों को लेकर इतनी चिंता नहीं होती थी। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और दोस्तों के साथ बिताए पलों में ज्यादा सहज रहते थे।
तरुणा वर्मा ने बचपन के खेलों का जिक्र करते हुए कबड्डी और रुमाल चोर जैसी गतिविधियों को याद किया। इन खेलों में दोस्तों के बीच जीतने की होड़ होती थी, लेकिन उस प्रतिस्पर्धा का आधार सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स नहीं थे। उन्होंने पुराने समय की दोस्ती और आज की सोशल मीडिया वाली दोस्ती के बीच के अंतर को भी अपने पोस्ट में रेखांकित किया।
उन्होंने आज के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले दिखावे की ओर भी इशारा किया। उनकी बातों में यह भाव नजर आया कि अब कई बार लोगों के बीच तुलना और लाइक्स की प्रतिस्पर्धा रिश्तों और दोस्ती के सहजपन को प्रभावित करती है।
उन्होंने बिजली चले जाने के एक सामान्य अनुभव को भी आज के मोबाइल-केंद्रित जीवन से जोड़कर बताया। पहले बिजली जाने पर लोग एक-दूसरे के साथ बैठते थे, जबकि अब कुछ समय के लिए फोन और इंटरनेट उपलब्ध न होने पर बेचैनी महसूस होने लगती है।
तरुणा वर्मा और विकास दिव्यकीर्ति की शादी 1998 में हुई थी। उनका एक बेटा है, जिसका नाम सात्विक है। तरुणा वर्मा वर्तमान में दृष्टि आईएएस की डायरेक्टर हैं। वह दृष्टि वेलफेयर फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं और संस्थान में अध्यापन का अनुभव रखती हैं।
