September 21, 2026

Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को करेगा। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा। शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी 50 करीब 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23346.40 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर रहा। पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी में करीब 0.22 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह लगातार छठा सप्ताह रहा जब निफ्टी साप्ताहिक आधार पर गिरावट के साथ बंद हुआ।

अब 21 सितंबर से शुरू होने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहेगी। सबसे अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें मानी जा रही हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम और तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ऊंची क्रूड कीमतें महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधि भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है। ऐसे में 21 सितंबर के कारोबार में निवेशक विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली और DII की खरीदारी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।

निफ्टी के तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विश्लेषणों में 23000 से 23100 के आसपास के क्षेत्र को महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना गया है। वहीं 23600 से 23700 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार की चाल में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि ये तकनीकी स्तर बाजार की दिशा की गारंटी नहीं देते और वास्तविक कारोबार वैश्विक तथा घरेलू घटनाक्रम के आधार पर बदल सकता है।

इस सप्ताह NSE का IPO भी बाजार की चर्चा में रहेगा। NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को इसका सब्सक्रिप्शन समाप्त होना है। इसके बाद 24 सितंबर को लिस्टिंग प्रस्तावित है। इस बड़े IPO से जुड़े आंकड़ों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी बाजार की नजर रहेगी।

इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड वैश्विक ब्याज दरों की स्थिति रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में 21 सितंबर को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने जोखिम को समझें। बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय उपलब्ध जानकारी के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना अधिक उचित माना जाता है।

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