September 20, 2026

CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

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नई दिल्ली । केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में वैल्यूअर और अधिकृत इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन और टैक्स रिकवरी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। संशोधित नियमों के कुछ प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने गए हैं, जबकि अन्य बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू किए गए हैं।

इनकम टैक्स अधिनियम, 2026 में चौथे संशोधन के तहत वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रक्रियाओं को संशोधित किया गया है। इसके तहत मौजूदा फॉर्म में भी जरूरी सुधार किए गए हैं, ताकि रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सके।

नए प्रावधानों के तहत वैल्यूअर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति को Form-169 में अपनी शैक्षणिक योग्यता, पिछली नौकरी और संबंधित पेशेवर अनुभव की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए वैल्यूएशन का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।

इस बदलाव का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति की योग्यता और अनुभव से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट रूप से दर्ज करना है। इससे वैल्यूअर के पेशेवर रिकॉर्ड और उनके द्वारा किए गए वैल्यूएशन से संबंधित विवरण प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

इसी तरह टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए Form-171 पेश किया गया है। इस फॉर्म में आवेदक को अपनी शैक्षणिक योग्यता और जरूरी प्रमाणपत्रों से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा यदि आवेदक से जुड़ी कोई अयोग्यता या डिस्क्वालिफिकेशन है, तो उसका विवरण भी देना आवश्यक होगा।

इनकम टैक्स नियमों में किए गए बदलावों का एक प्रमुख हिस्सा टैक्स कंप्लायंस प्रक्रिया से जुड़ा है। नए प्रावधानों के तहत प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। कंप्लायंस से संबंधित समयसीमा में विस्तार से संबंधित करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को अपनी जरूरी जानकारी दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

समयसीमा बढ़ाए जाने से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट्स और अन्य संबंधित टैक्सपेयर्स को अंतिम समय में होने वाली जल्दबाजी से राहत मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

CBDT ने टैक्स रिकवरी से जुड़े नियम 225 में भी संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के तहत इस नियम से जुड़े कई प्रावधानों को हटा दिया गया है। इनमें गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

संशोधन के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर किया गया है। पहले जिन प्रक्रियाओं को 30 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, उनकी समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।

इन बदलावों के साथ इनकम टैक्स नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन, अनुपालन और टैक्स रिकवरी से जुड़ी प्रक्रियाओं में संशोधन किया गया है। नए फॉर्म और विस्तारित समयसीमा का सीधा संबंध संबंधित पेशेवरों और करदाताओं की प्रक्रियात्मक

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