रूस पर 100% टैरिफ की तैयारी, फिर भी यूरेनियम खरीद का रास्ता खुला रखेगा अमेरिका
वाशिंगटन। रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा अमेरिका अपने परमाणु ईंधन हितों को लेकर रूस के साथ कुछ लेनदेन का रास्ता खुला रख रहा है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत भारत और चीन जैसे रूस से बड़े पैमाने पर ऊर्जा खरीदने वाले देश अमेरिकी टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं। वहीं रूस से जुड़े कुछ नागरिक परमाणु सहयोग और यूरेनियम आयात को प्रतिबंधों से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।
यह स्थिति अमेरिका की रूस नीति में ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र को लेकर अलग-अलग रुख को सामने लाती है। एक ओर रूस की तेल-गैस आय से जुड़े देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी है, तो दूसरी ओर अमेरिकी परमाणु ईंधन की जरूरतों को देखते हुए कुछ रूसी परमाणु आपूर्ति के लिए अपवाद रखा गया है।
100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला अधिनियम 2026’ पारित किया। इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा।
यह विधेयक रूस और ईरान के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध पैकेज का हिस्सा है। इसका उद्देश्य रूस से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है। हालांकि, इसी कानून में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी कुछ गतिविधियों के लिए अपवाद भी शामिल किए गए हैं।
रूस से यूरेनियम पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं
कानून के सेक्शन 111 में राष्ट्रपति को रूस से यूरेनियम आयात को नियंत्रित करने वाले मौजूदा अमेरिकी कानून की आवश्यकताओं को लागू करने का निर्देश दिया गया है। इसमें विशेष रूप से रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम और उसकी सहायक या उत्तराधिकारी इकाइयों से आने वाले यूरेनियम का उल्लेख है।
हालांकि, कानून के सेक्शन 114 में कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि रूस से जुड़े सभी परमाणु ईंधन लेनदेन पर एक साथ और पूरी तरह रोक लगाने का प्रावधान नहीं है।
सेक्शन 114 में दो अहम अपवाद
कानून के सेक्शन 114 में दो प्रमुख अपवाद बताए गए हैं। पहला, अमेरिका और रूस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग समझौतों के तहत होने वाली गतिविधियों पर संबंधित प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। ये समझौते अमेरिकी परमाणु ऊर्जा अधिनियम की धारा 123 के तहत किए जाते हैं।
दूसरा अपवाद कुछ कम-संवर्धित यूरेनियम (LEU) के आयात से जुड़ा है। ऐसे यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के तौर पर किया जाता है और कुछ आयात मौजूदा अमेरिकी कानून के दायरे में आते हैं। इसके अलावा कुछ मेडिकल आइसोटोप के आयात को भी छूट दी गई है, यदि उनके लिए पहले से अनुमति या छूट जारी की गई हो।
परमाणु ईंधन में रूस पर अमेरिका की निर्भरता
रूस से जुड़े परमाणु ईंधन के लिए अपवाद का एक प्रमुख कारण अमेरिका की अपनी ऊर्जा जरूरतें हैं। रूस लंबे समय से यूरेनियम संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अमेरिका ने व्यापक आर्थिक क्षेत्रों में रूस पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश की है, लेकिन परमाणु ईंधन के क्षेत्र में बदलाव अपेक्षाकृत जटिल रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अमेरिकी नागरिक परमाणु संयंत्रों ने 2025 में कुल 12.71 मिलियन सेपरेटिव वर्क यूनिट्स (SWU) की एनरिचमेंट सर्विसेज हासिल कीं। इनमें रूस की हिस्सेदारी 3.284 मिलियन SWU रही, जो कुल का करीब 26 फीसदी है।
अमेरिका के साथ फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स भी आपूर्तिकर्ता
अमेरिका में घरेलू स्तर पर होने वाली यूरेनियम एनरिचमेंट की हिस्सेदारी करीब 23 फीसदी रही। इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स भी अमेरिकी परमाणु उद्योग को एनरिचमेंट सर्विसेज उपलब्ध कराते हैं।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में अमेरिका के लिए रूस की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में रूस पर व्यापक आर्थिक दबाव बढ़ाने के बावजूद अमेरिकी कानून में परमाणु क्षेत्र से जुड़ी कुछ गतिविधियों के लिए अपवाद रखे जाने को उसकी घरेलू परमाणु ईंधन जरूरतों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
