महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया
बातचीत में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र से आई कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए। छात्राओं का कहना था कि आदिवासी आवासीय स्कूलों और हॉस्टलों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी निजता और सुविधा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।
भंडारा के एक आदिवासी हॉस्टल का मुद्दा भी बातचीत के दौरान सामने आया। एक छात्रा ने बताया कि वहां करीब 15 लड़कियों को एक ही कमरे में रखा जाता है। छात्राओं ने हॉस्टल में जगह की कमी के अलावा वॉशरूम से जुड़ी परेशानियों की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित तौर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि कुछ छात्राओं को ऐसी जांच से गुजरना पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर छात्राओं ने अपनी नाराजगी और असहजता व्यक्त की। हालांकि, सामने रखे गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।
छात्राओं ने कथित यौन शोषण से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय के बच्चों को ही आरोपी बनाया जा रहा है। छात्राओं ने ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।
हॉस्टल की समस्याओं में केवल सुरक्षा और जांच से जुड़े मुद्दे ही शामिल नहीं थे। छात्राओं ने छात्रवृत्ति, वॉशरूम और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत भी की। उनका कहना था कि सरकारी आदिवासी स्कूलों और आवासीय संस्थानों में विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि पढ़ाई और रहने के दौरान उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इन शिकायतों के बीच अभिजीत दीपके ने आदिवासी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। नागपुर स्थित आदिवासी विकास भवन में छात्र अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों से उनकी परेशानियों और हॉस्टल की स्थिति से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा गया है। इसके लिए आपसी संपर्क और जानकारी जुटाने की व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई।
अभिजीत दीपके ने 17 सितंबर से ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से करने की बात कही गई है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में संचालित स्कूलों और आवासीय विद्यालयों की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं और स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।
आदिवासी छात्राओं की ओर से सामने आई शिकायतों के बाद हॉस्टल की व्यवस्थाओं, बुनियादी सुविधाओं, छात्राओं की सुरक्षा और कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट से जुड़े आरोपों पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इन आरोपों की जांच और संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
