मद्रास हाईकोर्ट ने मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव पर रोक से किया इनकार, इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने पर उठाए सवाल
नई दिल्ली ।मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव जीतने के कुछ समय बाद विधायक पद से इस्तीफा देकर उसी सीट से दूसरी पार्टी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने की स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की।
न्यायालय ने ऐसी स्थिति को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के जनादेश से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। अदालत ने कहा कि निर्वाचित विधायक का जल्द इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी के टिकट पर उसी सीट से फिर चुनाव लड़ना मतदाताओं के दिए जनादेश का अनादर है।
चेन्नई के अधिवक्ता के सुथन की ओर से दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति के गोविंदराजन की पीठ ने बुधवार को सुनवाई की। याचिका में मांग की गई थी कि जिन नेताओं ने दल बदलकर दोबारा चुनाव लड़ने के लिए अपनी विधायक सीट छोड़ी है, उनसे उपचुनाव कराने का खर्च वसूला जाए।
पीठ ने चुनाव आयोग से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि इस्तीफा देकर ऐसी स्थिति पैदा करने वाले विधायकों पर उपचुनाव के वित्तीय बोझ को डालने की व्यवस्था पर विचार होना चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि एस जयकुमार, मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा, इसाक्की सुबैया, सी विजयभास्कर और एमआर विजय भास्कर ने इस्तीफा देकर तमिझगा वेत्री कषगम यानी टीवीके का रुख किया था। इनमें से मदुरंतकम और धारापुरम सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की गई है, जबकि बाकी पांच सीटों पर कानूनी याचिकाएं लंबित होने के कारण चुनाव नहीं कराया गया है।
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मरगथम कुमारवेल और पी सत्यभामा को टीवीके ने उन्हीं सीटों से दोबारा उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर खाली किया था। याचिका में आशंका जताई गई कि यदि ऐसी स्थिति के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई गई तो भविष्य में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो सकते हैं और इसका अतिरिक्त वित्तीय भार सरकारी खजाने पर पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा कि किसी विधायक को इस्तीफा देने से रोका नहीं जा सकता। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है, जब इस्तीफा देने वाला वही व्यक्ति अपनी छोड़ी हुई सीट से फिर चुनाव लड़ता है। अदालत ने कहा कि इस असाधारण स्थिति के समाधान के लिए संसद या चुनाव आयोग को व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
महाधिवक्ता विजय नारायण ने अदालत को बताया कि मौजूदा कानून पूर्व विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ने से नहीं रोकता। इसलिए उपचुनाव रोकने की मांग वाली याचिका स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि छह विधायकों के इस्तीफे की स्वीकृति से संबंधित याचिका पर पहली पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा है। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी।
याचिका 12 सितंबर को दायर की गई थी। इसमें मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनावों पर रोक लगाने के साथ दोनों टीवीके उम्मीदवारों के नामांकन रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने असामयिक इस्तीफों से चुनाव आयोग और सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ का मुद्दा भी उठाया था।
मूल मामले के अनुसार, अन्नाद्रमुक के बागी विधायक मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा ने 13 मई को विधानसभा में टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद दोनों ने अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे दिया और सीटें रिक्त घोषित की गईं। बाद में टीवीके ने उन्हें अपने गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में इन्हीं सीटों से मैदान में उतारा।
मदुरंतकम और धारापुरम सीटों के लिए द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने भी उम्मीदवार घोषित किए हैं। नाम तमिलर काची और वामपंथी दलों के चुनाव मैदान में उतरने के कारण इन सीटों पर कई दलों के बीच मुकाबला होने की स्थिति बनी है।
