Uttarakhand: हरियाली से लेकर कूड़े के ढेर तक की होगी एआई मैपिंग
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अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने पहले चरण में शुरू किया काम
उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर लगे कूड़े के ढेर से लेकर हरियाली वाले क्षेत्रों की भी एआई आधारित मैपिंग की जा रही है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने इसके लिए पहले चरण का काम शुरू कर दिया है। सैटेलाइट की मदद से और विस्तार से इन्हें चिह्नित करके सरकार उस हिसाब से अपनी योजना बना सकेगी।
राज्य के विभिन्न जनपदों में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग क्षेत्रों को अब अंतरिक्ष से खोजा जाएगा। हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी के जरिए शहरी और उप-शहरी क्षेत्रों के विस्तार के साथ-साथ शहरों में हरित क्षेत्रों का एआई आधारित मानचित्रण और अनुश्रवण शुरू कर दिया गया है। यानी अब कंक्रीट के जंगलों के बीच हरियाली का हर इंच रिकॉर्ड में होगा।
इसके अलावा यूसैक के वैज्ञानिक हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट डाटा का उपयोग करके चारधाम यात्रा मार्ग और देहरादून जिले में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग क्षेत्रों का भी चिह्नांकन कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वित्तपोषण से चल रहा है। वहीं, रुद्रप्रयाग व नैनीताल जिलों में उपग्रह आधारित वनावरण क्षेत्रों व वनों की कटाई के प्रमुख क्षेत्रों का भी अनुश्रवण किया जा रहा है।
कृषि के लिए अलग-अलग काम
यूसैक के वैज्ञानिक कृषि के नजरिए से भी अलग-अलग काम कर रहे हैं। कृषि गतिविधि में स्थानिक और कालिक प्रवृत्तियों का मूल्यांकन करने के लिए चयनित जिलों में रबी सीजन के दौरान सक्रिय कृषि भूमि में हुए परिवर्तनों की निगरानी सैटेलाइट की मदद से की जा रही है। वहीं, टेम्पोरल उपग्रह डाटा का उपयोग करके रबी सीजन के लिए सक्रिय कृषि भूमि की पहचान की जा रही है। अन्य सक्रिय कृषि भूमि की भी मैपिंग की जा रही है।
यूसैक निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत का कहना है कि प्रदेश में कई जगहों की डंपिंग साइट, हरियाली वाले क्षेत्रों, कृषि भूमि का सैटेलाइट अध्ययन किया जा रहा है। इससे राज्य में कृषि उत्पादन को और बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। क्षेत्र विशेष के हिसाब से भी फसलें और बेहतर हो सकेंगी।
