मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा
मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। हालांकि, 21 सितंबर के बाद चक्रवात या लो प्रेशर एरिया की गतिविधि बनने पर कुछ हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।
अभी दो सिस्टम, लेकिन असर सीमित
प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ अरब सागर में लो प्रेशर एरिया भी सक्रिय है। फिलहाल दोनों सिस्टम का प्रदेश में व्यापक असर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय मौसम तंत्र सक्रिय होने से कुछ जिलों में तेज बारिश जरूर हो सकती है।
पिछले 24 घंटे में झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच और दतिया के सेंवढ़ा में 4 इंच पानी गिरा। बुधवार को भोपाल, सीहोर समेत कुछ अन्य जिलों में भी बारिश हुई।
21 सितंबर के बाद बन सकता है नया दौर
मौसम विभाग के अनुसार 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश की स्थिति नहीं है, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं। 21 सितंबर के बाद चक्रवात और लो प्रेशर एरिया की गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। इसके असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।
मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस लिहाज से अब मानसून की विदाई में 13 दिन बाकी हैं। हालांकि, प्रदेश के कुछ जिलों से मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक भी विदा हो सकता है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस बार मानसून समय पर विदा हो सकता है। इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।
अक्टूबर की बारिश मानसूनी आंकड़े में नहीं जुड़ेगी
मध्य प्रदेश में मानसूनी बारिश की गणना 1 जून से 30 सितंबर के बीच होती है। इसलिए अक्टूबर में मानसून की विदाई के बाद होने वाली बारिश को मानसूनी सीजन के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा। कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक प्रदेश से पूरी तरह विदा होता है।
फिलहाल प्रदेश में औसत बारिश का आंकड़ा 33.1 इंच है, जबकि सामान्य बारिश 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटे तक पहुंचने के लिए करीब 4.2 इंच बारिश और जरूरी है।
पूर्वी MP में कमी घटकर 1% तक पहुंची
प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग आते हैं। यहां कुल मिलाकर बारिश सामान्य से 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 3% से 25% तक कम बारिश हुई है।
पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार आया है। कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात भी बने, जिससे सीजन की बारिश का औसत ऊपर आया। एक समय पूर्वी हिस्सा सामान्य से बेहतर स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन बुधवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 1% हो गया।
पश्चिमी हिस्से में ज्यादा जिले पिछड़े
पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 3% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।
इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर जिलों में बनी हुई है, जबकि प्रदेश के कई पूर्वी और उत्तरी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।
इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
अब नजर 21 सितंबर के बाद बनने वाली मौसम प्रणालियों पर है। यदि इनका असर प्रदेश पर व्यापक रहा तो मानसून के अंतिम दिनों में बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के और करीब पहुंच सकता है।
