मध्य अमेरिका में भयावह सूखा संकट, तीन देशों में इमरजेंसी; फसलें बर्बाद, करोड़ों लोगों पर असर
नई दिल्ली। मध्य अमेरिका में अल नीनो के प्रभाव के चलते सूखे का संकट लगातार गहराता जा रहा है। ग्वाटेमाला में सूखे से 32 लाख से अधिक लोगों के सामने तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत पैदा हो गई है। यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में मक्का और बीन्स की फसलें बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं। पैदावार में गिरावट और जल संकट बढ़ने से खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। हालात को देखते हुए होंडुरास, अल साल्वाडोर और पनामा में आपातकाल या रेड अलर्ट घोषित किया गया है।
होंडुरास से पनामा तक आपात स्थिति
होंडुरास ने 19 अगस्त को सूखे को लेकर आपातकाल घोषित किया था। इसके बाद 26 अगस्त को रेड अलर्ट का दायरा बढ़ाकर 103 नगरपालिकाओं तक कर दिया गया। अल साल्वाडोर के पर्यावरण मंत्रालय ने 25 अगस्त को पूरे देश में रेड अलर्ट जारी किया। यहां एक तरफ अनियमित बारिश और दूसरी ओर रिकॉर्ड गर्मी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
पनामा में भी सरकार ने 25 अगस्त को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया। देश की 11 प्रमुख जलधाराओं में जलस्तर कम होने से पनबिजली उत्पादन के साथ-साथ लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने पर भी संकट गहराया है।
रिकॉर्ड गर्मी और कम बारिश ने बढ़ाई परेशानी
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य अमेरिका में मौजूदा हालात सामान्य मौसमी सूखे से कहीं अधिक गंभीर हैं। अल साल्वाडोर में मई के दौरान सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि अगस्त में लगातार 19 दिन तक सूखे की स्थिति बनी रही। इस दौरान सांता रोसा डी लीमा में तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने भी इस वर्ष बेहद तीव्र अल नीनो की 90 प्रतिशत से अधिक संभावना जताई है। इसके चलते 1950 के बाद के कई पुराने मौसम रिकॉर्ड टूटने की आशंका व्यक्त की गई है।
पूर्वी अफ्रीका में भी फसलों पर असर
यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र की वैश्विक समीक्षा के अनुसार, अल नीनो का प्रभाव केवल मध्य अमेरिका तक सीमित नहीं है। पूर्वी अफ्रीका में भी भीषण गर्मी और सूखे के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहां 14 क्षेत्र अकाल के कगार पर पहुंच गए हैं। सूडान और दक्षिण सूडान में पहले से जारी गृहयुद्ध ने खाद्य संकट को और गंभीर बना दिया है।
वहीं मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, मध्य एवं दक्षिण एशिया तथा दक्षिणी दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में फिलहाल फसलों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है। इससे पता चलता है कि अल नीनो दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान के पैटर्न को एक समान तरीके से प्रभावित नहीं करता।
