ईरान-हूती तनाव के बीच जर्मनी में गुप्त सैन्य बैठक, अमेरिका-इजरायल के साथ 7 अरब देशों के चीफ जुटे
ब्रैड कूपर ने बुलाई बैठक, सार्वजनिक नहीं की गई जानकारी
बैठक का आयोजन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने किया था। यह मुलाकात पहले से सार्वजनिक नहीं की गई थी। बाद में CENTCOM ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जर्मनी में एक तय कॉन्फ्रेंस के दौरान आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मेजबानी की गई और मध्य-पूर्व में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें इजरायल और ऐसे अरब देशों के सैन्य अधिकारी एक साथ शामिल हुए, जिनमें से कुछ के इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। इजरायल और अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद इस स्तर की यह पहली बैठक बताई गई है।
अमेरिका ने कहा- मध्य-पूर्व से सेना हटाने की योजना नहीं
बैठक में एडमिरल कूपर ने कथित तौर पर सहयोगी देशों को बताया कि ईरानी हमलों के बावजूद अमेरिका की मध्य-पूर्व से अपनी सैन्य मौजूदगी हटाने की योजना नहीं है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सुरक्षित समुद्री आवाजाही और जहाजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ी अमेरिकी योजना की भी जानकारी दी।
वहीं, इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने विभिन्न मोर्चों पर चल रहे इजरायली सैन्य अभियानों के बारे में बैठक में जानकारी दी। इससे बैठक में ईरान के साथ संघर्ष के साथ-साथ क्षेत्रीय सैन्य तैयारियों पर भी चर्चा का संकेत मिलता है।
अब सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमले भी मुद्दा
बैठक ऐसे समय हुई है जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच हूती खतरे को लेकर सैन्य सहयोग भी बढ़ा है। 14 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और CENTCOM प्रमुख ब्रैड कूपर की जेद्दा में मुलाकात भी हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात और हूती हमलों पर चर्चा हुई।
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल, सऊदी अरब और CENTCOM के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि हूतियों के खिलाफ सऊदी अभियानों में इजरायल किस तरह सहायता कर सकता है। इसमें इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) सहयोग का विकल्प भी शामिल बताया गया है। हालांकि, इसे अभी किसी नए सैन्य गठबंधन या संयुक्त अभियान की घोषणा के तौर पर पेश नहीं किया गया है।
अब्राहम अकॉर्ड के बाद बढ़ा सैन्य तालमेल
अमेरिका-इजरायल और अरब देशों के बीच सैन्य समन्वय की पृष्ठभूमि 2020 के अब्राहम अकॉर्ड से भी जुड़ी है। इजरायल और यूएई-बहरीन के बीच समझौते के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में सहयोग के नए रास्ते खुले। इसके बाद इजरायल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में शामिल किया गया, जिससे अरब देशों के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहित अन्य सुरक्षा मुद्दों पर सैन्य समन्वय बढ़ा।
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान यूएई को आयरन डोम प्रणाली और उसके संचालन के लिए इजरायली कर्मियों की मदद भी दी गई। इसके अलावा इजरायल ने यूएई को रियल टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस सहायता देने तथा क्षेत्रीय साझेदारों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने की बात भी कही है।
होर्मुज से लेकर लाल सागर तक बढ़ी चुनौती
मध्य-पूर्व में इस समय सुरक्षा चिंता केवल ईरान तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर होने वाला तेल और व्यापारिक परिवहन, लाल सागर-बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती गतिविधियां और सऊदी अरब की सुरक्षा—तीनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जुलाई में भी CENTCOM ने बहरीन में 12 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद किया था, जिसमें हॉर्मुज से वाणिज्यिक आवाजाही की स्वतंत्रता और रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई थी।
जर्मनी की बैठक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय सैन्य सहयोग के साथ-साथ ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें भी चल रही हैं। इसलिए इस बैठक को मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य समन्वय के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे अपने आप किसी नई व्यापक जंग की शुरुआत तय नहीं होती।
