September 12, 2026

MIC में जीतू यादव की वापसी से भड़के कमलेश कालरा देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे परिवार संग बैठे धरने पर उठाए कई सवाल

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इंदौर  इंदौर में भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पार्षद कमलेश कालरा ने जीतू यादव की मेयर इन काउंसिल यानी MIC में दोबारा नियुक्ति के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को कालरा अपनी पत्नी अरुणा मां देवकी और बेटे के साथ राजबाड़ा पहुंचे और देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। हाथों में तख्तियां लेकर परिवार ने न्याय की मांग की। कालरा का कहना है कि जिस व्यक्ति पर उनके परिवार से जुड़े गंभीर मामले में आरोप लगे थे उसे दोबारा पार्टी में जगह देने के बाद MIC जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।

दरअसल महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर जीतू यादव को एक बार फिर MIC का सदस्य नियुक्त किया है। उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार भी सौंपा गया है। जीतू यादव की वापसी के साथ ही करीब डेढ़ साल पुराना कालरा और जीतू विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस विवाद के बाद भाजपा ने जीतू यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया था और उनकी MIC सदस्यता भी समाप्त कर दी गई थी। बाद में पुलिस की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद उनकी भाजपा में वापसी हुई और अब उन्हें MIC में भी दोबारा जिम्मेदारी मिल गई है।

कमलेश कालरा का कहना है कि जनवरी 2025 में उनके घर पर हमला हुआ था और इस मामले में जीतू यादव के समर्थकों के नाम सामने आए थे। कालरा ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान उनके परिवार को डराया गया और उनके बच्चे के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने लगातार न्याय की मांग की है लेकिन अब जीतू यादव को पार्टी में वापस लाने के साथ ही MIC में महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई है।

कालरा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी मामले में पुलिस ने चालान पेश किया है तो अंतिम निर्णय अदालत को करना होता है। उनका कहना है कि उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। अब वे इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। उनका सवाल है कि आखिर जीतू यादव को पार्टी में वापसी और MIC की जिम्मेदारी देने का फैसला किन आधारों पर किया गया।

कालरा ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से व्यक्तिगत दुश्मनी के तौर पर नहीं है बल्कि वे इसे न्याय की लड़ाई मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के निर्वाचित पार्षद हैं और पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं। उनके मुताबिक यदि एक पक्ष की बात सुनी जा रही है तो पीड़ित पक्ष की शिकायतों और सवालों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

राजबाड़ा पर परिवार के साथ धरने पर बैठने के बाद कालरा ने संकेत दिया कि उनका विरोध अभी खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बात पार्टी और सरकार के जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंचती तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। जरूरत पड़ने पर वे प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखने की बात भी कह चुके हैं।

जीतू यादव की MIC में वापसी के बाद शुरू हुआ यह नया विवाद इंदौर भाजपा की राजनीति में आने वाले दिनों में और हलचल पैदा कर सकता है। एक तरफ संगठन ने जीतू यादव को फिर से जिम्मेदारी दी है वहीं दूसरी तरफ भाजपा के ही निर्वाचित पार्षद कमलेश कालरा खुले तौर पर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व कालरा के विरोध और उनकी न्याय की मांग पर क्या रुख अपनाता है।

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