लता मंगेशकर के ‘थोड़ा रेशम लगता है’ की धुन पर बना अमेरिकी गाना हुआ हिट, कॉपीराइट विवाद में करोड़ों का दावा
यह गाना लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था। इसका संगीत दिग्गज संगीतकार बप्पी लाहिड़ी ने तैयार किया था और इसे अरुणा ईरानी पर फिल्माया गया था। अपनी धुन और संगीत के कारण यह गाना उस दौर में काफी लोकप्रिय हुआ और आज भी इसे याद किया जाता है।
मामला तब चर्चा में आया, जब अमेरिकी रैपर और प्रोड्यूसर DJ Quik ने इस गाने के संगीत और बीट्स का इस्तेमाल एक अमेरिकी गाने में किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अमेरिकी सिंगर Truth Hurts के लिए “Addictive” नाम का गाना तैयार किया था। इस गाने में “थोड़ा रेशम लगता है” की धुन और संगीत के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था।
“Addictive” गाना अमेरिका में काफी लोकप्रिय हुआ और बिलबोर्ड चार्ट के टॉप 10 में जगह बनाने में सफल रहा। यह गाना चार्ट पर नौवें स्थान तक पहुंचा था। हालांकि, इस गाने के निर्माण में भारतीय गाने के इस्तेमाल को लेकर अनुमति नहीं लिए जाने का विवाद बाद में सामने आया।
जब भारतीय म्यूजिक कंपनी को इस मामले की जानकारी मिली, तो अमेरिकी म्यूजिक लेबल से जुड़े पक्षों के खिलाफ कॉपीराइट को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई। मामले में 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने का दावा किए जाने की बात सामने आई। इसके साथ ही गाने की बिक्री और आगे होने वाली बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी।
इस विवाद ने भारतीय संगीत की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और कॉपीराइट अधिकारों को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया “थोड़ा रेशम लगता है” भारत में पहले ही लोकप्रिय था, लेकिन उसके संगीत के विदेशी इस्तेमाल के बाद यह गाना एक अलग वजह से भी सुर्खियों में आ गया।
दिलचस्प बात यह है कि इस धुन से जुड़ा संगीत बाद में भारत में भी दोबारा इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी गाने के बाद संगीतकार हैरी आनंद ने इसी विदेशी धुन और स्टाइल से प्रेरित होकर “कलियों का चमन” तैयार किया। यह गाना भी भारत में काफी लोकप्रिय हुआ।
इस तरह 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘ज्योति’ का “थोड़ा रेशम लगता है” कई दशक बाद अंतरराष्ट्रीय संगीत विवाद का हिस्सा बना। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड इस गाने की धुन का इस्तेमाल अमेरिकी गाने में किया गया, जिसके बाद कॉपीराइट को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हुआ। गाने की लोकप्रियता और उससे जुड़े विवाद ने इसे भारतीय संगीत के उन चर्चित उदाहरणों में शामिल कर दिया, जिनकी गूंज देश से बाहर तक पहुंची।
